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सुरेश रैना ने विनिंग मोमेंट को याद किया, बोले- जहीर गेंदबाजी डिपार्टमेंट के सचिन तेंदुलकर थे, युवी का भी बड़ा योगदान रहा

  • भारतीय टीम ने 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में श्रीलंका को 6 विकेट से हराया था, युवराज सिंह मैन ऑफ द सीरीज रहे थे
  • जहीर खान ने टूर्नामेंट में पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा 21 विकेट लिए

हलचल टुडे

Apr 04, 2020, 12:54 PM IST

खेल डेस्क. भारतीय ऑलराउंडर सुरेश रैना ने वनडे वर्ल्ड कप 2011 के विनिंग मोमेंट को याद किया। उन्होंने शुक्रवार को न्यूज एजेंसी से कहा कि वे इस पल को हर साल होली और दीवाली की तरह मनाते हैं। रैना ने कहा कि तब लोगों को लगता था कि भारत की बल्लेबाजी ही ज्यादा मजबूत है, लेकिन जहीर खान के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाजी ने कमाल दिखाया था। वे गेंदबाजी डिपार्टमेंट के सचिन तेंदुलकर थे। जहीर ने जरूरत के समय हर बार विकेट लेकर जीत को आसान किया था। इसके साथ ही युवराज सिंह का भी शानदान योगदान रहा था।

कपिल देव की कप्तानी में 1983 के बाद भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में 2011 में दूसरी बार वनडे वर्ल्ड कप खिताब जीता था। जिसे 2 अप्रैल को 2020 को 9 साल पूरे हो गए हैं। भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 6 विकेट से हराया था। युवराज मैन ऑफ द सीरीज रहे थे। जहीर ने टूर्नामेंट में पाकिस्तानी ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा 21 विकेट लिए थे। जहीर का 9 मैच में 18.76 का औसत रहा था।

‘सचिन के आउट होते ही ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा छा गया था’
रैना ने क्वार्टरफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 34 और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 36 रन की पारी खेली थी। उन्होंने फाइनल को लेकर कहा, ‘‘श्रीलंका ने चुनौतिपूर्ण लक्ष्य (275 रन) का टारगेट दिया था। ड्रेसिंग रूम में शांति छाई हुई थी। कुछ लोग नहाने चले गए थे, कुछ आइस बाथ ले रहे थे। जबकि कुछ लोग सिर्फ खा रहे थे, लेकिन सभी के दिमाग में ट्रॉफी ही घूम रही थी। सभी लोग अलग-अलग बैठे थे और एक दूसरे से बात नहीं कर रहे थे। सहवाग के आउट होने पर गौतम गंभीर (97 रन) मैदान में गए। सभी की निगाहें उन्हीं पर थी। इसके बाद सचिन पाजी के आउट होने के साथ ही ड्रेसिंग रूम में मानो सन्नाटा छा गया था। ’’

‘युवी से पहले धोनी बल्लेबाजी करने आए’
उन्होंने कहा, ‘‘इस दिन गंभीर का विश्वास से भरा हुआ था। उसको देखकर मुझे ऐसा लगा, जैसे वह हमारे लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहता है। धोनी (नाबाद 91 रन) फार्म में चल रहे युवराज के पहले बल्लेबाजी करने आए थे। धोनी ने कोच गैरी कर्स्टन से कहा था कि वे मुरलीधरन को अच्छे से खेल सकते हैं, इसलिए वे पहले जाना चाहते हैं। मुझे याद है कि सबकुछ कितने अच्छे से हुआ था।’’ फाइनल में रैना की बल्लेबाजी नहीं आ पाई थी।

भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 6 विकेट से हराया था
मुंबई में खेले गए 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 6 विकेट पर 274 रन बनाए थे। टीम के लिए महेला जयवर्धने ने 103 रन की नाबाद पारी खेली थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने 4 विकेट पर 277 रन बना लिए थे। टीम के लिए गौतम गंभीर ने 97 और कप्तान धोनी ने नाबाद 91 रन बनाए थे। इसके लिए धोनी को मैन ऑफ द मैच चुना गया था, जबकि युवी मैन ऑफ द सीरीज रहे थे।

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