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पूर्णिमा तिथि में किए काम होते हैं पूरे, इस दिन दान और उपवास का मिलता है अक्षय फल

हलचल टुडे

Apr 06, 2020, 07:48 PM IST

पूर्णिमा तिथि शुक्लपक्ष की 15वीं तिथि होती है। यानी पक्ष का आखिरी दिन। इस दिन चंद्रमा पूर्ण यानी अपनी 16 कलाओं वाला होता है। इस तिथि को धर्मग्रंथों में पर्व कहा गया है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। तीर्थ या पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है। इस दिन किए गए दान और उपवास से अक्षय फल प्राप्त होता है। 

ज्योतिष में पूर्णिमा का महत्व

सूर्य से चन्द्रमा का अन्तर जब 169 से 180 तक होता है, तब पूर्णिमा तिथि होती है। इसके स्वामी स्वयं चन्द्र देव ही हैं। पूर्णिमान्त काल में सूर्य और चन्द्र एकदम आमने-सामने होते हैं। यानी इन दोनों ग्रहों की स्थिति से समसप्तक योग बनता है। पूर्णिमा का विशेष नाम सौम्या है। यह पूर्णा तिथि है। यानी पूर्णिमा पर किए गए शुभ काम का पूरा फल प्राप्त होता है। ज्योतिष ग्रंथों में पूर्णिमा तिथि की दिशा वायव्य बताई गई है। 

हर महीने की पूर्णिमा पर होता है पर्व

हर माह की पूर्णिमा को कोई न कोई पर्व जरूर मनाया जाता है। इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्त्व हैं। हर महीने की पूर्णिमा पर एक समय भोजन किया जाए और चंद्रमा या भगवान सत्यनारायण का व्रत करें तो हर तरह के सुख प्राप्त होते हैं। साथ ही समृद्धि और पद-प्रतिष्ठा भी मिलती है। 

  1. चैत्र माह की पूर्णिमा पर हनुमान जयन्ती मनाई जाती है।
  2. वैशाख में इस तिथि को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।
  3. ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर वट सावित्री व्रत किया जाता है।
  4. आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन गुरु पूजा का विधान है। इसी दिन को कबीरदास जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
  5. श्रावण महीने की पूर्णिमा के दिन रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है।
  6. भाद्रपद की पूर्णिमा के पर उमा माहेश्वर व्रत किया जाता है।
  7. अश्विन महीने की पूर्णिमा तिथि को ही शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है।
  8. कार्तिक माह की पूर्णिमा पर पुष्कर मेला और गुरु नानक जयंती पर्व मनाया जाता है।
  9. मार्गशीर्ष की पूर्णिमा को श्री दत्तात्रेय जयंती पर्व मनाया जाता है।
  10. पौष माह की पूर्णिमा को शाकंभरी जयंती मनाई जाती है। जैन धर्म में पुष्यभिषेक यात्रा भी इसी दिन शुरू होती है। वहीं प्रयाग में त्रिवेणी संगम पर स्नान किया जाता है।
  11. माघ की पूर्णिमा पर संत रविदास, श्री ललिता और भैरव जयंती मनाई जाती है। इसे माघी पूर्णिमा कहा जाता है और इस दिन संगम पर स्नान करने का विशेष महत्त्व होता है।
  12. फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन पर्व मनाया जाता है।

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