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पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में 85% हिस्से पर काबिज हैं ये पांच कंपनियां, जानें क्यों है इनका दबदबा

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नई दिल्ली5 मिनट पहले

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  • चीन में टॉप-5 कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी सिर्फ 40% है
  • जापान में यह आंकड़ा 81% है, जो कि सबसे ज्यादा है

भारत के टॉप-5 कार निर्माताओं ने पैसेंजर व्हीकल (पीवी) बाजार पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। इन पांचों की बाजार हिस्सेदारी 85% है, जबकि अन्य 22 ब्रांड सिर्फ बाकी बचे 15% हिस्से में ही खेल रहे हैं।

दुनिया के नामी ग्लोबल ब्रांड्स जैसे रेनो, फोर्ड, होंडा, टोयोटा और फॉक्सवैगन भारतीय बाजार में उपस्थित है, बावजूद इसके पीसी सेगमेंट में मारुति सुजुकी, हुंडई, टाटा मोटर्स, किआ मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे ब्रांड्स का दबदबा है।

नवंबर’20 में टॉप-5 कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 4.5% बढ़ी
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि टॉप-5 कंपनियों ने इस साल नवंबर तक अपने शेयर में 4.5% की बढ़ोतरी की, जो कि पिछले साल नवंबर में 81.56% थी। एक बड़े बाजार के लिए (भारत दुनिया में चौथा सबसे बड़ा मोटर वाहन बाजार है) बाजार हिस्सेदारी में फ्रेगमेंटेशन की कमी आश्चर्य करने वाली है।

अन्य देशों में इतनी है टॉप-5 कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी

  • उदाहरण के लिए, चीन में, जो दुनिया का सबसे बड़ा मोटर वाहन बाजार है, टॉप-5 कार निर्माता बाजार का केवल 40% नियंत्रित करते हैं और अमेरिका में, उनका हिस्सा 68% है। जर्मनी के लिए, जो पिछले साल भारत से आगे निकल गया था, टॉप-5 कार निर्माता कंपनियों ने 50% हिस्सेदारी की कमान संभाली थी।
  • जापान लिस्ट में अपवाद बना हुआ है, जहां टॉप-5 कंपनियां लगभग 81% बाजार हिस्सेदारी को नियंत्रित करती हैं। जिनमें सभी जापानी ब्रांड हैं। कई देशों का प्रभावशाली ब्रांड टोयोटा की भारत में हिस्सेदारी सिर्फ 3% है।

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देखे-परखे ब्रांड पर ही जाना पसंद करते हैं ग्राहक- एनालिस्ट

  • नए लॉन्च और ब्रांड लॉयल्टी ने भारत के टॉप-5 कार निर्माता कंपनियों को अपने बाजार में सुधार करने में मदद की। हालांकि, देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के पास साल के दौरान कोई नया मॉडल लॉन्च नहीं हुआ है, फिर भी कंपनी अपने रिटेल शेयर में सुधार करने में सफल रही। मुंबई के एक सीनियर एनालिस्ट ने कहा कि लोग गाड़ी खरीदते समय देखे-परखे ब्रांड के साथ जाना ज्यादा पसंद करते हैं।
  • मारुति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने पिछले साल नवंबर में दर्ज 45% से नवंबर में अपनी बाजार हिस्सेदारी 50% से अधिक बढ़ा ली। “मारुति के कम लागत वाले मॉडल, मजबूत ब्रांड रिकॉल और व्यापक नेटवर्क ने पिछले कुछ महीनों के दौरान बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने में मदद की।

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बाजार हिस्सेदारी में किसे कितनी बढ़त

ब्रांड नवंबर’20

मार्केट शेयर(%)

नवंबर’20

नवंबर’19

मार्केट शेयर(%)

नवंबर’19

1. मारुति सुजुकी 1,43,554 49.33% 1,35,272 48.42%
2. हुंडई 47,162 16.21% 49,565 17.74%
3. टाटा 21,835 7.50% 13,514 4.84%
4. किआ 18,262 6.28% 10,572 3.78%
5. महिंद्रा एंड महिंद्रा 15,951 5.48% 18,945 6.78%
  • मारुति के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने पिछले साल नवंबर में दर्ज 45% से नवंबर में अपनी बाजार हिस्सेदारी 50% से अधिक बढ़ा ली। “मारुति के कम लागत वाले मॉडल, मजबूत ब्रांड रिकॉल और व्यापक नेटवर्क ने पिछले कुछ महीनों के दौरान बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने में मदद की।”
  • हुंडई ने नवंबर 2019 में देखी गई 17.74% की रिटेल बिक्री में नवंबर 2020 में मामूली गिरावट के साथ 16.21% रिटेल बिक्री दर्ज की।
  • टाटा मोटर्स ने रिटेल बाजार में हिस्सेदारी में नवंबर में 4.84% से 7.5% की वृद्धि के साथ दूसरी सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की, जबकि किआ मोटर्स ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जिसने 3.78% से 6.28% की हिस्सेदारी में सुधार।
  • टाटा मोटर्स के प्री-लॉकडाउन लॉन्च अल्ट्रोज और एसयूवी नेक्सन ने हिस्सेदारी को बेहतर बनाने में मदद की। किआ मोटर्स के रूप में, कॉम्पैक्ट एसयूवी सोनेट, जो अपने सेगमेंट में सबसे अधिक बिकने वाला बन गया है, ने इसे बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद की।
  • टाटा मोटर्स ने कुछ महीने पहले तीसरे स्थान पर कब्जा किया था – किआ मार्च में तीसरे नंबर पर पहुंच गया था, लेकिन वर्तमान में चौथे स्थान पर है।
  • भारत की पांचवीं सबसे बड़ी पीवी निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा को नवंबर में अपने समान समूह में सबसे खराब गिरावट का सामना करना पड़ा। महीने के दौरान 6.78% बाजार हिस्सेदारी से फिसल कर यह आंकड़ा 5.48% पर जा पहुंचा था।
  • महिंद्रा-एंड-महिंद्रा की गिरावट थार एसयूवी के आने के पहले आई। थार के लॉन्च होने के एक महीने के भीतर महिंद्रा-एंड-महिंद्रा का दावा है कि थार को 20,000 बुकिंग मिलीं। हालांकि, कंपनी थार के प्रोडक्शन में वृद्धि नहीं कर पाई है, जिससे छह महीने से अधिक की वेटिंग पीरियड हो गया।

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