Home दुनिया इटली के रास्ते पर भारत, मौत और केस की रफ्तार एक जैसी,...

इटली के रास्ते पर भारत, मौत और केस की रफ्तार एक जैसी, समय में बस एक महीने पीछे

  • एक मार्च तक इटली में कोरोनावायरस के 1577 केस आए थे, जबकि मौतें 41 हुई थीं
  • एक अप्रैल तक भारत में कोरोना के 1998 केस आए थे और 58 मौतें हुई थीं
  • एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में कोरोना का ग्राफ एकदम इटली जैसा ही दिख रहा

हलचल टुडे

Apr 09, 2020, 11:19 AM IST

नई दिल्ली. भारत में कोरोना का ग्राफ इटली जैसा ही दिख रहा है। अंतर बस समय का है। कोरोनावायरस के मामलों और मौतों के लिहाज से देखें तो भारत अब तकरीबन इटली के रास्ते पर ही बढ़ रहा है। बस हम समय में उससे एक महीने पीछे हैं। वर्ल्ड मीटर के आंकड़ों के मुताबिक एक अप्रैल तक भारत में कोरोना के 1998 केस आए थे और 58 मौतें हुई थीं। एक महीने पीछे यानी एक मार्च के इटली के आंकड़े देखें तो वहां इस तारीख तक कोरोना के 1577 केस आए थे, जबकि मौतें 41 हुई थीं। सोमवार यानी छह अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोनावायरस के 4778 केस सामने आ चुके हैं, जबकि 136 मौतें हुई हैं। अब इससे एक महीने पीछे चलें, यानी इटली में 6 मार्च तक का कोरोना ग्राफ देखें तो वहां 4636 केस आए थे, जबकि 197 मौतें हुई थीं।

रोजाना की स्थिति: भारत में अब रोज उतने ही केस आ रहे, जितने एक महीने पहले रोज इटली में आ रहे थे

भारत और इटली में रोजाना के केस और मौतों की संख्या भी लगभग एक जैसी ही है। यहां भी बस अंतर समय का है। एक महीने पहले इटली में रोजाना भारत जितने ही केस आ रहे थे और मौतें भी लगभग बराबर हो रही थीं। इटली में एक मार्च को 573 केस आए थे और 12 मौतें हुई थीं। एक महीने बाद भारत में एक अप्रैल को 601 केस आए और 23 मौतें हुईं।

रोजाना की मृत्युदर: भारत में कोरोना से रोज की औसत मृत्युदर भी एक महीने पहले के इटली जैसे ही है

कोरोनावायरस से भारत और इटली में रोजाना की मृत्युदर भी लगभग एक जैसी है। दोनों देशों के बीच अंतर सिर्फ समय का है। आंकड़ों पर गौर पर करें तो पता चलता है कि एक महीने पहले इटली में कोरोना से रोजाना की औसत मृत्युदर तकरीबन भारत के मौजूदा हालात जैसे ही थे। 1 मार्च को इटली में कोरोना से मृत्युदर 33.01 फीसदी थी। एक महीने बाद 1 अप्रैल को भारत में कोरोना से मृत्यदर 28.16 फीसदी थी।

भारत में अब तक कोरोनावायरस के केस कम होने के पीछे की बड़ी वजहें

1- कम टेस्टिंग होना: भारत में अभी तक सिर्फ 85 हजार लोगों का ही कोरोनावायरस टेस्ट हुआ है, यानी एक लाख की आबादी पर सिर्फ 6.5 लोगों का ही टेस्ट हो रहा है

  • 130 करोड़ आबादी वाले देश में जिस तरह कोरोना वायरस के लिए स्क्रीनिंग और सैंपल टेस्ट किए जा रहे हैं, वो नाकाफी हैं। भारत में 6 अप्रैल तक करीब 85 हजार टेस्ट हो पाए हैं। कुछ राज्यों में अब भी रोजाना-250 से 500 तक टेस्ट ही किया जा रहा है। इसमें एक व्यक्ति के कई टेस्ट होते हैं। इसलिए भी भारत में कोरोना के केस कम आए हैं। भारत में अभी एक लाख की आबादी पर महज 6.5 लोगों की ही टेस्ट हो सका है।
  • वहीं, दुनिया के अन्य देशों इसकी स्थिति भारत से उलट है। दक्षिण कोरिया की आबादी महज 5.1 करोड़ है। वहां अब तक 2.5 लाख से अधिक लोगों का टेस्ट किया जा चुका है। एक अप्रैल तक के आंकड़ों के मुताबिक हर एक लाख की आबादी पर बहरीन ने 20,075 लोगों का, दक्षिण कोरिया ने 8,222 का, इटली ने 8,385 का, ऑस्ट्रिया ने 6,203 का, ब्रिटेन ने 2,109 का, अमेरिका ने 447 का, जापान ने 257 लोगों का कोरोना टेस्ट किया है। चीन ने मार्च के अंत तक कुल 3.20 लाख लोगों का टेस्ट किया था।

2- लॉकडाउन जल्द लागू होना: इस वजह से कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, इसीलिए अभी रोजाना औसतन 500 केस ही सामने आ रहे हैं

  • डब्ल्यूएएचओ का कहना है कि भारत सरकार ने सही समय पर लॉकडाउन लागू किया। इसीलिए देश में कोरोना के केस कम आ रहे हैं। भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार चीन, अमेरिका ओर यूरोपीय देशों के तुलना में काफी धीमी है।
  • 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन तक देश में 374 केस थे। उसके बाद 8 दिनों में करीब 820 केस सामने आए हैं। यानी एक दिन में औसतन 100 केस ही सामने आए। 31 मार्च को 1635 केस थे। 6 अप्रैल को यह संख्या बढ़कर 4778 हो गई। यानी 6 दिन में 3145 केस आए हैं। देश में अब औसतन एक दिन में 500 से ज्यादा कोरोना केस आ रहे हैं।
  • एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि भारत में कोरोनावायरस एक महीने से दूसरे स्टेज में ही बना हुआ है, अभी यह तीसरे स्टेज में नहीं पहुंच पाया है। जिसे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का फेज भी कहा जाता है। जबकि अमेरिका में 10 दिन में ही कोरोनावायरस के केस एक हजार से 20 हजार तक पहुंच गए थे। 

3- बीसीजी का टीका लगना: भारत समेत दुनिया के जिन देशों में लंबे समय से बीसीजी का टीका लग रहा, वहां लोगों में कोरोनावायरस का खतरा कम है

  • भारत में कोरोनावायरस की रफ्तार कम होने के पीछे बीसीजी टीके को भी खास बताया जा रहा है। दरअसल, भारत में 72 साल से बीसीजी के जिस टीके का इस्तेमाल हो रहा है, उसे दुनिया अब कोरोना से लड़ने में मददगार मान रही है।
  • न्यूयॉर्क इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के डिपार्टमेंट ऑफ बायोमेडिकल साइंसेस की स्टडी के मुताबिक, अमेरिका और इटली जैसे जिन देशों में बीसीजी वैक्सीनेशन की पॉलिसी नहीं है, वहां कोरोना के मामले भी ज्यादा सामने आ रहे हैं और मौतें भी ज्यादा हो रही हैं। वहीं, जापान और ब्राजील जैसे देशों में इटली और अमेरिका के मुकाबले मौतें फिलहाल कम हैं।
  • बीसीजी का पूरा नाम है, बेसिलस कामेट गुएरिन। यह टीबी और सांस से जुड़ी बीमारियों को राेकने वाला टीका है। बीसीजी को जन्म के बाद से छह महीने के बीच लगाया जाता है। मेडिकल साइंस की नजर में बीसीजी का वैक्सीन बैक्टीरिया से मुकाबले के लिए रोग प्रतिरोधक शक्ति देता है। इससे शरीर को इम्यूनिटी मिलती है, जिससे वह रोगाणुओं का हमला झेल पाता है। हालांकि, कोरोना एक वायरस है, न कि बैक्टीरिया।

जो थ्योरी फेल हो गई- 

गर्म मौसम की वजह से: ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना ज्यादा फैला, इसलिए लोग खुद ही सोचने लगे कि गर्मी में यह वायरस नहीं फैलता, एक्सपर्ट्स अभी किसी नतीजे पर नहीं

  • कोरोनावायरस अभी तक सबसे ज्यादा ठंडे मौसम वाले देशों में फैला है और इन्हीं देशों में सबसे ज्यादा मौतें भी हुईं। इसलिए लोग खुद-ब-खुद मानने लगे कि कोरोना गर्म जलवायु वाले देशों में कम फैलता है। सोशल मीडिया पर ऐसे संदेश भी बहुत शेयर किए गए। जबकि यह थ्योरी फेल हो चुकी है, क्योेंकि ब्राजील और खाड़ी के कुछ देशों में अब कोरोना तेजी से फैल रहा है। वो भी गर्मी के बावजूद।
  • इसके अलावा टाइफाइड गर्मी के मौसम में चरम पर होता है। खसरे के केस गर्म इलाकों में गर्मी के मौसम में कम हो जाते हैं, वहीं ट्रॉपिकल(गर्म) इलाकों में शुष्क मौसम में खसरे के केस चरम पर होते हैं। शायद इसलिए ही कहा जा रहा था कि कोविड-19 पर भी गर्म मौसम का असर होगा। भारत में गर्मी में कोरोना खत्म हो जाएगा। लेकिन अभी तक इसके बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इसको लेकर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिक भी अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच हैं। 
  • इसके बारे में ब्रिटिश डॉक्टर सारा जार्विस कहती हैं कि 2002 के नवंबर में सार्स महामारी शुरू हुई थी, जो जुलाई में खत्म हो गई थी। लेकिन ये तापमान बदलने की वजह से हुआ या किसी और अन्य वजह से ये बताना मुश्किल है।

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

च्वॉइस को कंट्रोल कर क्या गूगल यूजर्स के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर रही? संसदीय समिति ने किया सवाल

Hindi NewsBusinessIs Google Not Infringing On The Fundamental Rights Of Users By Controlling Choice Parliamentary Committee Questionedनई दिल्ली2 घंटे पहलेकॉपी लिंकभाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी...

सुप्रीम कोर्ट का फैसला NDPS एक्ट में दिया इकबालिया बयान सुबूत नहीं, सतीश मानशिंदे बोले- रिया के लिए अब इसका मतलब नहीं

एक घंटा पहलेकॉपी लिंकसुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा बयान दिया जो सुर्खियां बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने नशीले पदार्थों से जुड़े...

कालानी नगर के थैरेपी सेंटर के बाथरूम में खून से लथपथ मिली संचालिका, गला और हाथ ब्लेड से कटा

Hindi NewsLocalMpIndoreBlood soaked Operator, Throat And Hand Cut With Blade In The Bathroom Of Therapy Center Of Kalani Nagarइंदौर37 मिनट पहलेकॉपी लिंकबाथरूम में खून...

कांग्रेस कैंडिडेट बोल रहे थे- लोग जानते हैं, किसे और कब गिराना है; तभी मंच टूट गया

Hindi NewsLocalBiharJale Darbhanga Bihar Congress Candidate Mashkoor Usmani Falls From Stage : Bihar Assembly Electionपटना2 घंटे पहलेजाले में भाषण देने के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी...