Home दुनिया दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य बेसों पर स्मेल टेस्ट किया जा रहा,...

दक्षिण कोरिया में अमेरिकी सैन्य बेसों पर स्मेल टेस्ट किया जा रहा, इससे कोरोना के शुरुआती लक्षणों का आसानी से पता लग रहा

  • स्क्रीनिंग के तहत लोगों को सेब का सिरका सूंघने के लिए दिया जाता है
  • अगर लोग इसे नहीं समझ पाते तो यह संक्रमण के शुरुआती लक्षण हैं
  • संक्रमित व्यक्ति धीरे-धीरे सुगंध और स्वाद की शक्ति खोने लगता है

हलचल टुडे

Apr 07, 2020, 10:52 AM IST

सियोल. कोरोनावायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया डरी हुई है। इसकी बड़ी वजह है कि बीमारी का पता बड़ी देर से चल पाता है। इस समस्या का समाधान दक्षिण कोरिया स्थित अमेरिकी सैन्य बेस ने ढूंढा है। उन्होंने यहां मौजूद हर व्यक्ति का स्मेल टेस्ट करना शुरू किया है। इससे शुरुआती तौर पर यह पता चल जाता है कि व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है अथवा नहीं। 

अमेरिकी सेना के अफसर कैरोल और हेनरी सैन्य बेस के आस-पास के इलाकों में यह टेस्ट कर रहे हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया के प्रमुख शहरों में भी यह टेस्ट हो रहा है। स्क्रीनिंग की इस प्रक्रिया के तहत लोगों को सेब का सिरका सूंघने के लिए कहा जाता है। अगर लोग इसकी खुशबू ले पाते हैं तो ठीक, नहीं ले पाने की सूरत में इसे कोरोना के शुरुआती लक्षण के तौर पर देखा जाता है। इस टेस्ट में फेल होने के बाद संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग की जाती है। ताकि इसकी पुष्टि की जा सके कि उसमें कोरोना संक्रमण है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के अलग-अलग मेडिकल संस्थानों ने भी इस बात को माना है कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति की सूंघने और स्वाद पता करने की शक्ति खत्म हो जाती है।

दक्षिण कोरिया में देगु सैन्य बेस से ही संदिग्धों की पहचान के इस तरीके की शुरुआत हुई 

दक्षिण कोरिया में कोरोना की स्क्रीनिंग की शुरुआत सबसे पहले देगु के सैन्य बेस पर ही हुई थी। कोरोनावायरस के फैलने की शुरुआत में ही यहां स्मेल स्क्रीनिंग टेस्ट के साथ हर आने-जाने वाले का तापमान लेना अनिवार्य कर दिया गया था। इसीलिए, बेस में संक्रमण का अब तक एक भी मामला सामने नहीं आया। इसके बाद देश के अन्य सैन्य बेस और बड़े शहरों में यह स्क्रीनिंग प्रक्रिया अनिवार्य कर दी गई। गैरीसन सैन्य बेस के कमांडिंग अफसर एडवर्ड बैलेंकों के मुताबिक सावधानी बरतने की वजह से ही हमारे बेस पर एक भी सदस्य संक्रमित नहीं हुआ।

स्थानीय अस्पतालों में भी ऐसे ही जांच हो रही, डब्ल्यूएचओ कर रहा शोध

कर्नल बैलेंको ने बताया कि स्थानीय अस्पतालों में भी ऐसे ही स्क्रीनिंग हो रही है। इसमें व्यक्ति को सिरके में भीगी रुई सूंघने के लिए कहा जाता है और कुछ सवाल पूछे जाते हैं। उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ भी यह पता लगाने के लिए शोध कर रहा है कि कोरोना संक्रमण का स्वाद पहचानने और सूंघने की शक्ति पर क्या असर पड़ता है।  

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

हैदराबाद ने पंजाब से टॉस जीतकर बॉलिंग चुनी; मयंक, नीशम और नदीम टीम से बाहर

Hindi NewsSportsCricketIpl 2020KXIP Vs SRH IPL 2020 Live Score Update; KL Rahul David Warner| Kings XI Punjab Vs Sunrisers Hyderabad Match 43rd Live Cricket...

चंद्रमा पर राहु-शनि की अशुभ छाया पड़ने से आज परेशान हो सकते हैं 7 राशि वाले लोग

14 घंटे पहलेकॉपी लिंकअशुभ ग्रह-स्थिति की वजह से कुछ लोगों को जॉब और बिजनेस में रहना होगा संभलकर24 अक्टूबर, शनिवार को चंद्रमा मकर राशि...

ढाकेश्वरी देवी शक्तिपीठ, जहां मां की प्रतिमा की सीध में 4 शिव मंदिर, आईना दिखाकर किया जाता है विसर्जन

Hindi NewsInternationalShaktipeeth Dhakeswari, Where 4 Shiva Temples Lined Up In Front Of The Idol Of The Mother, Are Immersed In A Mirror.12 घंटे पहलेयहां...

दूसरी तिमाही में आईटी कंपनियों ने दिए शानदार नतीजे, इन शेयरों पर एक्सपर्ट दे रहे हैं निवेश की सलाह

Hindi NewsBusinessHCL Infosys TCS Wipro Share Price: India's Top IT Firms Quarterly Result And Share Market Returnsमुंबई20 मिनट पहलेकॉपी लिंकबीते छह महीने में निफ्टी...