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अप्रैजल में देरी और नौकरी छूटने का डर बढ़ने से कर्मचारियों में बढ़ी हताशा, कंपनियां भी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए अपना रहीं कई उपाय

  • कई कंपनियां हैप्प्पिनेस सेशन चलाने के लिए ले रहीं मनोवैज्ञानिकों की सेवाएं
  • कुछ कंपनियां आवश्यक सेवा देने वाले कर्मचारियों को दे रही हैं अतिरिक्त लाभ

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 03:02 PM IST

नई दिल्ली. कोविद-19 के कारण कर्मचारियों में अपने भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। बहुत सारे कर्मचारियों को नौकरी छूटने का डर सता रहा है, तो कई कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी गई है। और लगभग सभी कर्मचारियों के अप्रैजल में देरी हो गई है। कर्मचारियों की ऐसी मनोस्थिति को देखते हुए कंपनियां भी उन्हें प्रेरित करने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रही है। कुछ कंपनियां वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए कर्मचारियों के लिए हैप्पिनेस सेशन चलाने के लिए मनोवैज्ञानिक की सेवा ले रही हैं। कुछ कंपनियों के प्रबंधनकर्मी कर्मचारियों से संवाद बनाकर उन्हें नियमित तौर पर कारोबारी स्थिति से अवगत करा रहे हैं। वहीं कुछ कंपनियां बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त लाभ देने और उनके करियर विकास के लिए जरूरी कदम उठाने का वादा कर रही हैं।

वायरस संक्रमण का असर कर्मचारी और कंपनी दोनों पर हुआ है
विशेषज्ञों ने कहा कि कोरोना संकट और लॉकडाउन के कारण कर्मचारी और कंपनियां बहुत अधिक तनाव में हैं। टीमलीज सर्विसेज में इंडस्ट्र्रियल मैन्यूफैक्चरिंग एंड इंजीनियरिंग एंड जनरल स्टाफिंग के बिजनेस हेड सुदीप सेन ने कहा कि निश्चित रूप से तनाव की स्थिति है। जिस तरह की स्थिति से हम गुजर रहे हैं, वह पहले कभी देखी नहीं गई है। जहां तक अप्रैजल की बात है, तो कंपनियों के रुख के बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि वायरस संक्रमण का असर कंपनियों के कारोबार पर भी पड़ा है।

कार्यस्थल पर जाकर काम करने वालों की चिंता वर्क फ्रॉम होम कर्मचारियों से अलग
कुछ रिटेल टच पॉइंट इस महामारी के दौरान भी खुले हुए हैं और जो कर्मचारी अब भी हेल्थकेयर, फूड सर्विसेज और आवश्यक मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में जाकर काम करते हैं, उनकी चिंता और तनाव का स्तर उन कर्मचारियों से अलग है, जो घर से काम कर रहे हैं। कार्यस्थल पर जाकर काम करने वाले कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि वे सहकर्मियों और ग्राहकों से संक्रमित हो सकते हैं। उन्हें यह भी चिंता सता रही है कि उनकी कंपनी उन्हें जरूरी सुरक्षा दे पाएगी या नहीं। एक और बड़ी चिंता तो यह है कि कार्यस्थल पर जाते समय उन्हें कई जगह पुलिस द्वारा रोका जा सकता है। ऐसे समय में कुछ कंपनियां कुछ अतिरिक्त कदम उठा रही हैं। वे आवश्यक सेवा वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त भत्ता दे रही हैं। इसके अलावा वे कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए अधिक स्पर्ष वाली जगहों को नियमित रूप से सैनीटाइज कर रही हैं, सैनीटाइजर स्टेशन लगा रही हैं और सभी कर्मचारियों के तापमान की जांच कर रही हैं।

वालमार्ट इंडिया अपने स्टोर कर्मचारियों को रोजाना 200 रुपए अतिरिक्त दे रही है
वालमार्ट इंडिया के एक प्रवक्ता ने कहा कि हम अपने स्टोरों के ऐसे कर्मचारियों के खास तौर से आभारी हैं, जो ऐसे समय में अपने समुदाय की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। हम उन्हें उनके वेतन के ऊपर लॉकडाउन के दौरान हर रोज की उपस्थिति के लिए 200 रुपए की मानद राशि भी देंगे। हम अपने स्टोर के कर्मचारियों को घर से कार्यालय आने के दौरान होने वाले खर्च की भरपाई कर रहे हैं।

कर्मचारियों को तनावमुक्त रखने के लिए हैप्पिनेस सेशन आयोजित कर रही हैं कंपनियां
संकट के इस समय में एचआर अधिकारी और कार्मिक प्रबंधक कर्मचारियों को प्रोत्साहन और सहयोग दे रहे हैं। उनके साथ नियमित संवाद कर रहे हैं और ताजा कारोबारी स्थिति और सकारात्मक खबरों से अवगत करा रहे हैं। मौजूदा स्थिति से बाहर निकलने के लिए कंपनियों द्वारा उठाए जा रहे कदमों को सयोग दे रहे हैं। कर्मचारियों को प्रेरित करने और तनाव से मुक्त रखने के लिए कई कंपनियां कर्मचारियों के लिए विशेष ऑनलाइन सत्र भी आयोजित कर रही हैं। साइकोलॉजिस्ट हैप्पिनेस कोच साक्षी मंध्यान ने कहा कि अनिश्चित भविष्य को बारे में सोच कर चिंता पैदा होती है। उन्होंने कई कंपनियों के लिए ऐसे हैप्पिनेस सेशन चलाए हैं। उन्होंने कहा कि इस महीने होने वाले अप्रैजल के आधार पर कई कर्मचारियों ने अप्रैल और उसके बाद के लिए योजना बनाकर रखी होंगी। लेकिन दुर्भाग्य है कि अप्रैजल नहीं हो पा रहा है। मंध्यान पहले मैक्स हॉस्पीटल से जुड़ी हुई थीं। अब वह गुड़गांव में अपना मंध्यान क्लिनिक चला रही हैं।

मौजूदा समय में फूंक-फूंक कर खर्च करने की नीति है बेहतर
मंध्यान ने कहा कि लोग अभी उन बातों पर फोकस कर रहे हैं, जो उनके हाथ में है, न कि उन पर जो उनके हाथ से बाहर है। उदाहरण के लिए नौकरी बचेगी या नहीं, यह कर्मचारी के हाथ में नहीं है। इसलिए इस वक्त बहुत गहराई से सोच-समझकर खर्च करना चाहिए। अच्छी बात यह है कि घर में रहने से लोगों का खर्च घट गया है। अभी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना चाहिए और जिन फिजूलखर्ची को रोका जा सकता है, उससे बचना चाहिए। यदि हम कुछ पीढ़ी पीछे जाकर देखें, तो पाएंगे कि उस समय कई प्रकार के खर्च नहीं हुआ करते थे। इसके बावजूद वे खुश थे।

कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार के कूपन भी दे रही हैं कंपनियां
कई कंपनियां कर्मचारियों को ऑनलाइन टूलकिट और संसाधन दे रही हैं, ताकि वे बेहतर तरीके से काम कर सकें। कुछ कंपनियां ऐसे समय में अपनी लर्निंग व डेवलपमेंट गतिविधियों को आगे बढ़ा रही हैं। एसएचआरएम इंडिया की परामर्श सेवाओं के एसोसिएट डायरेक्टर आशीष कौल ने कहा कि कंपनियां अपने कर्मचारियों की बेहतरी, बेहतर मनोदशा और स्थिरता व लॉयल्टी को लेकर भी चिंतित हैं। यह चिंता उन कर्मचारियों के लिए और ज्यादा है, जो बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। कई कंपनियां कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए मील्स ऑर्डर करने और ऑनलाइन योगा क्लास के लिए कूपन दे रही हैं।

कंपनियां कारोबार को बनाए रखने पर अधिक और कर्मचारियों को जोड़े रखने में कम ध्यान दे सकती हैं
ग्लोबल एक्जीक्यूटिव रिक्रूटमेंट ऑर्गनाइजेशन अंतल इंटरनेशनल इंडिया के एमडी जोसेफ देवासिया ने कहा कि कर्मचारी और कंपनी दोनों के लिए यह जिम्मेदारी पूर्वक काम करने वाला समय है। कंपनियों को अपने कर्मचारियों के प्रति सहानुभूति बरतनी चाहिए और कारोबारी मामलों में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। ऐसे संकट के समय में कंपनियां उन कर्मचारियों पर ज्यादा ध्यान देगी, जो कंपनियों के विकास में ज्यादा योगदान कर रहे हैं। अगले 12 महीने में हर कंपनी को कभी न कभी अपने आकार को थोड़ा छोटा करना पड़ सकता है। इसलिए वेतन कटौती, सुविधाओं और लाभ में कटौती और बोनस और वेतन बढ़ोतरी पर रोक आम बात हो सकती है। मौजूदा स्थिति में कंपनियां कारोबार को बनाए रखने पर अधिक और कर्मचारियों को अपने साथ बनाए रखने में कम ध्यान देंगी।

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