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इंडिया इंक के टॉप मैनेजमेंट की सेलरी में हो सकती है भारी कटौती, कोटक के बाद इंडियाबुल्स हाउसिंग में भी कटा वेतन

  • इंडिया बुल्स के चेयरमैन इस साल नहीं लेंगे सेलरी
  • वाइस चेयरमैन की सेलरी 75 प्रतिशत कटी

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 06:13 PM IST

मुंबई. कोविड-19 का सीधा असर अब इंडिया इंक यानी भारतीय कॉर्पोरेट कंपनियों पर दिखना शुरू हो गया है। इसी कड़ी में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस के शीर्ष प्रबंधन ने अपनी सेलरी में कटौती का फैसला किया है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि आनेवाले समय में अन्य कंपनियां भी इसी तरह का निर्णय ले सकती हैं।

खर्चों पर नियंत्रण के लिए की गई सेलरी में कटौती

रविवार को स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने कहा है कि कंपनी के शीर्ष प्रबंधन यानी टॉप मैनेजमेंट ने अपनी सेलरी में औसतन 35 प्रतिशत की कटौती का फैसला किया है। यह कटौती चालू वित्तीय वर्ष में होगी। हालांकि यह कटौती कोविड-19 के कारण हुई है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। प्रबंधन ने कहा है कि यह कटौती खर्चों के नियंत्रण के लिए की गई है। इसके तहत कंपनी के चेयरमैन समीर गहलौत ने अपनी पूरी सेलरी न लेने का फैसला किया है। जबकि वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डाइरेक्टर गगन बग्गा की सेलरी में 75 प्रतिशत की कटौती होगी।

चेयरमैन की सेलरी सालाना 25 करोड़ रुपए

सूचना के मुताबिक कंपनी के शीर्ष प्रबंधन ने यह फैसला किया है कि खर्चों पर नियंत्रण के लिए इच्छा के अनुरूप सेलरी में कटौती की जाए जो औसतन 35 प्रतिशत हो। कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक समीर गहलौत की वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान 25 करोड़ रुपए से अधिक की सालाना सेलरी रही है। जबकि गगन बग्गा की 15.83 करोड़ रुपए, अश्विनी कुमार की 7.23 करोड़ रुपए, अजीत मित्तल की 3.45 करोड़ रुपए, सचिन चौधरी की 5.26 करोड़ रुपए सेलरी रही है। इस तरह से साल भर में इन लोगों को कुल मिलाकर 57.01 करोड़ रुपए सेलरी के रूप में दिया गया है।

तीन साल से सेलरी में कोई इजाफा नहीं

सालाना रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन सालों में समीर गहरौत की सेलरी में कोई इजाफा नहीं किया गया है। हालांकि स्टॉक ऑप्शन पर इस कटौती का कोई असर नहीं हुआ है। बता दें कि इससे पहले पिछले हफ्ते ही कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक ने इस चालू वित्तीय वर्ष में महज एक रुपये सेलरी लेने की घोषणा की थी और इसके साथ ही सभी टॉप मैनेजमेंट के अधिकारियों की सेलरी में 15 फीसदी की कटौती की घोषणा की थी।

और भी कंपनियां अपना सकती हैं वेतन कटौती का रास्ता

दरअसल कोविड-19 की वजह से एक तो मार्च से कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और दूसरी ओर इन कॉर्पोरेट कंपनियों ने सरकार के राहत कोष में भी दान दिया है। इसके अलावा अगले कुछ समय तक कारोबार में स्थिरता दिखाई नहीं दे रही है। इसलिए खर्चों में कटौती पर नियंत्रण के लिए कॉर्पोरेट कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन अब अपनी सेलरी में कटौती का रास्ता अपना रहे हैं। एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख ने रविवार को कहा कि कोविड-19 की रिकवरी के लिए कम से कम 9 महीने लग सकते हैँ।

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