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दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया में भारत लंबी रेस का घोड़ा, अन्य देशों के मुकाबले ज्यादा विकास करेगा

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नई दिल्ली26 मिनट पहले

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UN इकॉनोमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसिफिक (UNESCAP) द्वारा तैयार रिपोर्ट -फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स एंड आउटलुक इन एशिया एंड द पैसिफिक 2020/2021- में कहा गया है कि दक्षिण और दक्षिण पश्चिम एशिया में इनवार्ड FDI फ्लो 2019 में 2 फीसदी घटकर 66 अरब डॉलर का रहा, जो 2018 में 67 अरब डॉलर था

  • रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान इस क्षेत्र के कुल FDI इन्फ्लो का 77% हिस्सा भारत को मिला
  • भारत ने इस दौरान 51 अरब डॉलर का FDI हासिल किया, जो 2018 के मुकाबले 20% ज्यादा है
  • सबसे ज्यादा FDI इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) और सहायक क्षेत्रों को मिला

संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया कि दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम एशिया में लंबी अवधि में भारतीय अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा विकास दिखने की उम्मीद है। कोरोनावायरस महामारी के बाद सकारात्मक लेकिन कम विकास रहने और देश के विशाल बाजार के कारण यह निवेश आकर्षित करता रहेगा। UN इकॉनोमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड पैसिफिक (UNESCAP) द्वारा तैयार रिपोर्ट -फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट ट्रेंड्स एंड आउटलुक इन एशिया एंड द पैसिफिक 2020/2021 में कहा गया है कि दक्षिण और दक्षिण पश्चिम एशिया में इनवार्ड FDI फ्लो 2019 में 2 फीसदी घटकर 66 अरब डॉलर का रहा, जो 2018 में 67 अरब डॉलर था।

रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान इस क्षेत्र के कुल FDI इन्फ्लो का 77 फीसदी हिस्सा भारत को मिला। भारत ने इस दौरान 51 अरब डॉलर का FDI हासिल किया, जो 2018 के मुकाबले 20 फीसदी ज्यादा है। पिछले सप्ताह आए इस रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा FDI इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) और सहायक क्षेत्रों को मिला।

दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम एशिया से FDI का आउटफ्लो लगातार चौथे साल बढ़ा

रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम एशिया से FDI का आउटफ्लो लगातार चौथे साल बढ़ा। यह 2018 के 14.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2019 में 15.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी मुख्यत: भारत से आउटफ्लो बढ़ने के कारण हुई। इस क्षेत्र के कुल FDI आउटफ्लो में 80 फीसदी योगदान भारत ने किया। 2019 में भारत ने विदेश में 12.1 अरब डॉलर का निवेश किया, जो 2018 के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा है। निकट अवधि में हालांकि इस क्षेत्र के FDI इन्फ्लो और आउटफ्लो दोनों में गिरावट रह सकती है।

इस साल की पहली तीन तिमाहियों में इस क्षेत्र के कुल ग्रीनफील्ड इन्फ्लो का 87% भारत को मिला

इस साल की पहली तीन तिमाहियों में ग्रीनफील्ड FDI इन्फ्लो में साल-दर-साल आधार पर 43 फीसदी गिरावट रही। इससे लगता है कि इस क्षेत्र में ग्रोथ का ट्रेंड उलट गया है। इस क्षेत्र के कुल ग्रीनफील्ड इन्फ्लो का 87 फीसदी भारत को मिला। हालांकि भारत के ग्रीनफील्ड इन्फ्लो में साल-दर-साल आधार पर 29 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि लंबी अवधि में इस क्षेत्र में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे ज्यादा रिसाइलिएंट रहेगी। महामारी के बाद भारत का FDI इन्फ्लो भले ही थोड़ा-थोड़ा लेकिन लगातार बढ़ रहा है। भारत का विशाल बाजार आगे भी निवेश आकर्षित करता रहेगा।

भारत के टेलीकॉम व खासकर डिजिटल सेक्टर में तेजी से विकास हो सकता है

भारत के टेलीकॉम और खासकर डिजिटल सेक्टर में तेजी से विकास हो सकता है, क्योंकि ग्लोबल वेंचर कैपिटल कंपनियां और टेक्नोलॉजी कंपनियां अधिग्रहण के जरिये भारतीय बाजार में रुचि दिखा रही हैं। इस साल जियो प्लेटफॉर्म में फेसबुक ने 5.7 अरब डॉलर और गूगल ने 4.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। अनुमानों के मुताबिक 2025 तक IT और बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट, डिजिटल कम्युनिकेशन सर्विसेज और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग जैसे कोर डिजिटल सेक्टर्स का आकार बढ़कर दोगुना हो सकता है। साथ ही महामारी के कारण कृषि, शिक्षा, एनर्जी, फाइनेंशियल सर्विसेज और लॉजिस्टिक जैसे कई सेक्टर्स में डिजिटलाइजेशन बढ़ता जा रहा है।

निकट अवधि में इस क्षेत्र के फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चरिंग में निवेश घटेगा

निकट अवधि में इस क्षेत्र के फार्मास्यूटिकल मैन्यूफैक्चरिंग में निवेश घटेगा, क्योंकि महामारी के दौरान फार्मा सेक्टर में आपूर्ति श्रृंखला खराब होने से यूरोप और अमेरिका की अधिकतर कंपनियां कुछ हद तक स्थानीय सोर्सिंग को अपना सकती हैं। इसके कारण इस क्षेत्र के और खासकर भारत के फार्मा मैन्यूफैक्चरिंग हब प्रभावित होंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्लोबल FDI इन्फ्लो में एशिया-पैसिफिक का योगदान 2018 के 45 फीसदी से घटकर 2019 में 35 फीसदी पर आ गया। वहीं ग्लोबल FDI आउटफ्लो में एशिया-पैसिफिक का योगदान इस दौरान 52 फीसदी से घटकर 41 फीसदी रह गया।

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