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दुनिया में हर 5 में से 4 लोग लॉकडाउन से प्रभावित, भारत के करीब 40 करोड़ मजदूर हो सकते हैं और गरीब: रिपोर्ट

  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा- भारत के पास कोरोना से पैदा हुए हालात का सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं
  • ‘लॉकडाउन के कारण भारत, नाइजीरिया और ब्राजील में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगार सबसे ज्यादा प्रभावित’

हलचल टुडे

Apr 09, 2020, 05:31 AM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप और उससे निपटने के लिए जारी देशव्यापी लॉकडाउन के कारण भारत में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लगभग 40 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की आशंका है। इससे उनकी नौकरियों और कमाई पर बुरा असर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोगों को और गरीबी में धकेल देगा। भारत ने महामारी पर लगाम लगाने के लिए 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है। आईएलओ ने कहा कि भारत उन देशों शामिल है, जिसके पास हालात का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
दुनियाभर के 2.7 अरब श्रमिक प्रभावित
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने बुधवार को एक रिपोर्ट में कहा कि दुनियाभर में दो अरब से ज्यादा लोग अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं। दुनिया में पांच में से चार लोग ( 81%) आंशिक या पूर्ण लॉकडाउन से प्रभावित हैं। जेनेवा में जारी आईएलओ की रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘कोरोना के कारण असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों लोग प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन के कारण भारत, नाइजीरिया और ब्राजील में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कामगारों पर ज्यादा असर पड़ा है।’’

भारत के 90% कामगार असंगठित क्षेत्र में हैं
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘भारत में करीब 90 प्रतिशत लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। ऐसे में करीब 40 करोड़ कामगारों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है। इससे वे गरीबी के दुश्चक्र में फंसते चले जाएंगे। कामकाज बंद होने से लाखों मजदूर गांव लौट गए हैं। दुनियाभर में इस संकट से कामगारों के काम के घंटों और कमाई पर असर पड़ेगा।’’ 

आईएलओ की रिपोर्ट में कोविड से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई और संकट से पार पाने के लिए नीतिगत उपायों का सुझाव दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, संकट के कारण 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में 6.7% कामकाजी घंटे खत्म होने की आशंका है। यानी कोरोना वायरस महामारी के कारण केवल दूसरी तिमाही में ही 19.5 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
इन क्षेत्रों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट में के मुताबिक, कोविड का फूड सर्विस, मैन्यूफैक्चरिंग, रिटेल, बिजनेस और इससे जुड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव गतिविधियों पर सबसे ज्यादा असर होगा। आईएलओ के महानिदेशक गाई रायडर ने कहा कि कामगार और कारोबार दोनों इस वक्त भयावह चुनौती का सामना कर रहे हैं। संकट को खत्म करने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। सही दिशा में उठाया गया कदम निर्णायक साबित होगा।

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