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लॉकडाउन से सबसे ज्यादा एमएसएमई का निर्यात प्रभावित होगा, इसकी कुल निर्यात में 45% हिस्सेदारी

हलचल टुडे

Apr 09, 2020, 04:21 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी के कारण देश में चल रहे 21 दिनों के लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के निर्यात पर पड़ेगा। यह बात ट्रेड एक्सपर्ट्स ने कही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एमएसएमई निर्यातकों पर असर की भयावहता का अंदाजा विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के उस बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें इस महामारी के कारण माल के वैश्विक व्यापार में 2020 तक 13 प्रतिशत से 32 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई गई है। आपको बता दें कि देश के कुल निर्यात में एमएसएमई की हिस्सेदारी 45 फीसदी से ज्यादा है, जबकि जीडीपी में 25 फीसदी से ज्यादा का योगदान है।

निर्यातकों के लिए तुरंत इंसेंटिव पैकेज लाए सरकार: विश्वजीत धर
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) दिल्ली में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर विश्वजीत धर का कहना है कि मौजूदा हालातों से एमएसएमई सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है और सरकार को निर्यातकों के लिए तुरंत इंसेंटिव पैकेज लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण भारत बुरी तरह से प्रभावित हुआ है और इसका सबसे ज्यादा असर एमएसएमई निर्यातकों पर पड़ा है। इसके अलावा निर्यातक अपने उन वर्कर्स को वापस बुलाने में भी कठिनाई का सामना करेंगे जो अपने गांवों और कस्बों को लौट गए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका, जापान और जर्मनी जैसे कई देशओं ने राहत पैकेजों की घोषणा की है लेकिन भारत सरकार ने अभी तक निर्यातकों के लिए कोई उपाय नहीं किए हैं। इंसेंटिव से निर्यातकों को स्थिति सामान्य होने पर तुरंत काम शुरू करने में मदद मिलेगी, वरना वे अपने वैश्विक खरीदारों को खो देंगे।

कोरोना से ज्यादा निर्यात होने वाले उत्पादों को झटका: राकेश मोहन जोशी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (आईआईएफटी) में प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी का कहना है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में आभासी ठहराव आ गया है। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों के बीच सप्लाई चेन बाधित होने और मांग कम होने के कारण भारत से ज्यादा निर्यात होने वाले उत्पादों जैसे पेट्रोकैमिकल्स, जेम्स एंड ज्वैलरी, ऑटोमोबाइल एंड ऑटो कंपोनेंट, कॉटन यार्न एंड टैक्सटाइल, अपैरल, मरीन उत्पाद, मीट को झटका लगा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह महामारी फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर के लिए विशाल अवसर लेकर आई है जिसमें भारत जैनेरिक मैडिसिन के मामले में यूरोपियन और अमेरिकी जैसे प्रतियोगी बाजारों के बावजूद सबसे बड़ा सप्लायर है।

कृषि उत्पादों से जुड़े एमएसएमई पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत : चिराला शंकर
असिस्टेंट प्रोफेसर और कृषि अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ चिराला शंकर राव का कहना है कि इस समय कृषि उत्पादों से जुड़े एमएसएमई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसका कारण यह है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य उत्पादों की मांग में तेजी आई है। ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) के चेयरमैन मोहित सिंगला ने भी कुछ इसी तरह के विचार रखते हुए कहा कि मौजूदा संकट के कारण आवश्यक कमोडिटी जैसे चावल, गेहूं और दालों की मांग में 100 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई है।

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