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1930 से भी ज्यादा भयावह होगी 2020 की मंदी, निपटने के लिए चाहिए सैकड़ों अरब डॉलर का पैकेज, क्रिस्टलीना जॉर्जिवा, आईएमएफ प्रमुख

  • विकसित देशों और उभरते हुए बाजारों पर होगा ज्यादा असर
  • दुनिया ने नहीं देखा था ऐसा संकट

हलचल टुडे

Apr 10, 2020, 04:11 PM IST

मुंबई. साल 2020 की मंदी 1930 की महामंदी की तुलना में ज्यादा भयावह होगी। यह बात अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कही। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 2021 में इस मंदी से थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

जॉर्जिवा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अगले हफ्ते आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की बैठक होने वाली है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया ऐसे संकट से जूझ रही है जो उसने पहले कभी नहीं देखा था। Covid-19 ने हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को काफी तेजी से खराब किया है। ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा था।

मंदी से निपटने के लिए सैकड़ों अरब डॉलर की होगी जरूरत

उन्होंने कहा कि कोरोनावायरस महामारी के संक्रमण के कारण कुछ हफ्ते पहले से ही सामाजिक आर्थिक असर नजर आने लगे थे। इस महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर की सरकारें पहले ही भारी पैकेज दे चुकी हैं पर इससे निपटने के लिए उन्हें सैकड़ों अरब डॉलर की जरूरत होगी। इस संकट का सबसे बुरा असर उभरते हुए बाजारों और विकसित देशों पर पड़ेगा। दुनिया इस संकट की अवधि को लेकर असाधारण रूप से अनिश्चित है। लेकिन यह पहले ही साफ हो चुका है कि 2020 में वैश्विक वृद्धि दर में जोरदार गिरावट आएगी। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि हम महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखेंगे।

170 से अधिक देशों में घटेगी प्रति व्यक्ति आय

जॉर्जिवा के मुताबिक सिर्फ तीन महीने पहले तक हम अपने 160 सदस्य देशों में प्रति व्यक्ति इनकम में इजाफे की उम्मीद कर रहे थे। अब 170 से अधिक देशों में प्रति व्यक्ति आय घटने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस वायरस से लोगों की जान जा रही है और इससे मुकाबले के लिए लॉकडाउन करना पड़ा है जिससे अरबों लोग प्रभावित हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले सब सामान्य था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, लोग काम पर जा रहे थे, हम परिवार और दोस्तों के साथ थे। लेकिन आज यह सब करने में जोखिम है।

1929 में हुई थी महामंदी की शुरुआत

महामंदी को दुनिया की अर्थव्यवस्था के सबसे बुरे दौर के रूप में जाना जाता है। इसकी शुरुआत 1929 में अमेरिका में वॉलस्ट्रीट पर न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के धराशायी होने से हुई थी। महामंदी का दौर करीब दस साल चला था। उनके मुताबिक इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक पाबंदियां लगाई गई हैं, जिससे दुनिया की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंच रही है। विशेषरूप से खुदरा, होटल, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र इससे प्रभावित हुए हैं।

कम आय वाले देशों में है ज्यादा जोखिम

आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि अफ्रीका, लातिनी अमेरिका और एशिया के एक बड़े हिस्से के उभरते बाजार और कम आय वाले देशों में जोखिम काफी अधिक है। सबसे पहले उनकी स्वास्थ्य प्रणाली काफी कमजोर है। इसके अलावा उन्हें घनी आबादी वाले शहरों और मलिन बस्तियों में इस चुनौती से जूझना है जहां शारिक रूप से सुरक्षित दूरी बना कर रहने का विकल्प ही नहीं है।

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