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DLF की रेंटल यूनिट गुरुग्राम के एक प्रोजेक्ट में खरीद रही है अमेरिकी पार्टनर का हिस्सा, 780 करोड़ रुपये में हुआ सौदा

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12 घंटे पहले

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  • DLF और सिंगापुर के GIC की JV कंपनी DCCDL ने फेयरलीफ रियल एस्टेट में हाइंस की हिस्सेदारी खरीदने के लिए उसके मैनेज्ड फंडों के साथ करार किया है
  • फेयरलीफ रियल एस्टेट के पास ‘वन होराइजन सेंटर’ का मालिकाना हक है, इसमें 8,13,000 वर्ग फुट का महंगा ए ग्रेड ऑफिस और कंप्लीमेंटरी रिटेल स्पेस है

देश की दिग्गज रियल्टी फर्म DLF की रेंटल यूनिट DLF साइबर सिटी डेवलपर्स लिमिटेड (DCCDL) गुरुग्राम के एक प्रीमियम कमर्शियल प्रोजेक्ट में अपनी अमेरिकी पार्टनर हाइंस की पूरी हिस्सेदारी 780 करोड़ रुपये में खरीद रही है। DLF और सिंगापुर के सॉवरेन वेल्ड फंड GIC के ज्वाइंट वेंचर वाली कंपनी DCCDL ने फेयरलीफ रियल एस्टेट में हाइंस की हिस्सेदारी खरीदने के लिए उसके मैनेज्ड फंडों के साथ करार किया है।

वन होराइजन सेंटर में हाइंस का 52 पर्सेंट शेयर, बाकी DCCDL के पास

फेयरलीफ रियल एस्टेट के पास ‘वन होराइजन सेंटर’ का मालिकाना हक है और वही इसको ऑपरेट करती है। वन होराइजन सेंटर में लगभग 8,13,000 वर्ग फुट का महंगा वाला ए ग्रेड ऑफिस स्पेस और कंप्लीमेंटरी रिटेल स्पेस है। इस सेंटर में हाइंस के पास लगभग 52 पर्सेंट हिस्सेदारी है जबकि बाकी DCCDL के पास है। इसके करार में DCCDL के पास फर्स्ट राइट ऑफ रिफ्यूजल है, यानी हाइंस को इसमें अपना हिस्सा बेचने पर सबसे पहले ऑफर पार्टनर को देना होगा। डील अगले क्वॉर्टर में पूरी हो जाने की उम्मीद है।

डील से प्रॉपर्टी रेंटल में होगी 160 करोड़ रुपये सालाना की बढ़ोतरी

DLF के MD, रेंटल बिजनेस श्रीराम खट्टर ने बताया कि कंपनी के पास अब प्रॉपर्टी का पूरा मालिकाना हक हो गया है। उन्होंने कहा कि यह खरीदारी कंपनी के लिए वैल्यू बढ़ाने वाली होगी और इससे रेंटल रेवेन्यू में लगभग 150 से 160 करोड़ रुपये सालाना की बढ़ोतरी होगी।

DCCDL के पास हो जाएगा 3.4 करोड़ वर्ग फुट का रेंटल पोर्टफोलियो

इस प्रॉपर्टी की खरीदारी के बाद DCCDL के पास लगभग 3.4 करोड़ वर्ग फुट का ऑपरेशनल रेंटल पोर्टफोलियो हो जाएगा। DLF ने GIC के साथ यह ज्वाइंट वेंचर दिसंबर 2017 में तब बनाया था जब DLF के प्रमोटरों ने DCCDL में अपनी पूरी 40 पर्सेंट हिस्सेदारी 12,000 करोड़ रुपये में बेच दी थी। उस डील के जरिए DCCDL में 33.34 पर्सेंट हिस्सेदारी GIC के हाथों लगभग 9,000 करोड़ रुपये में बेची गई थी जबकि 3,000 करोड़ रुपये के शेयर DCCDL ने बायबैक किए थे।

DCCDL में है DLF की 66.66 पर्सेंट हिस्सेदारी, बाकी GIC के पास है

DCCDL में DLF की 66.66 पर्सेंट हिस्सेदारी है जबकि बाकी GIC के पास है। पिछले वित्त वर्ष में अच्छी क्वॉलिटी के ऑफिस और रिटेल स्पेस की मजबूत मांग के चलते DCCDL की रेंटल इनकम 15 पर्सेंट बढ़कर 3,006 करोड़ रुपये हो गई थी।

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