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इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से पहले देखें इसमें कोरोनावायरस जैसी महामारी कवर होंगी या नहीं? कंपनी के अस्पतालों का नेटवर्क भी चेक करें

  • कोरोनावायरस से देश में 3 मौतें हो चुकी हैं वहीं 150 से ज्यादा लोग इससे पीड़ित हैं
  • भारत में इलाज 17 फीसदी की सालाना दर से महंगा हो रहा है

हलचल टुडे

Mar 19, 2020, 01:02 PM IST

यूटिलिटी डेस्क. कोरोनावायरस का कहर लागातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या उनके हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में कोरोनावायसर जैसी बीमारियों से इलाज का खर्च कवर होगा या नहीं? इसके अलावा जो लोग नया प्लान लेने की सोच रहे हैं उनके मन में भी कोरोना के कवर को लेकर कई तरह के सवाल हैं। अगर आप भी इन दिनों कोरोना या अन्य बीमारियों के इलाज को कवर करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने का विचार कर रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कोरोनावायरस जैसी महामारी कवर होंगी या नहीं?
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसमें सभी बीमारियों के अलावा महामारी जैसे स्वाइल फ्लू या कोरोनावायरस के इलाज का खर्च कवर है या नहीं। एचडीएफसी एग्रो हेल्थ इंश्योरेंस के ब्रांच मैनेजर अतुल सागर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसने किसी भी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा हो, वह कोरोना के इलाज का क्लेम लेने के लिए पात्रता रखता है लेकिन शर्त यह है कि पॉलिसी का 30 दिन का वेटिंग पीरियड खत्म हो गया हो और वह हॉस्पिटल में एडमिट होकर कोरोनावायरस का इलाज करा रहा हो। हालांकि कई बीमा कंपनियां अब कोरोनावायरस के लिए अलग से इंश्योरेंस पॉलिसी भी लेकर आई हैं।

पहले से मौजूद बीमारियां कवर हैं कि नहीं
सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करते हैं। लेकिन, इन्हें 48 महीने के बाद ही कवर किया जाता है। कुछ 36 महीने बाद इन्हें कवर करते हैं। हालांकि, पॉलिसी खरीदते वक्त ही पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताना महत्वपूर्ण होता है। इससे क्लेम सेटेलमेंट में दिक्कत नहीं आती है। को-पेमेंट फीचर की जांच कर लें सभी प्लान में को-पेमेंट फीचर हो, यह जरूरी नहीं है। लेकिन सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में यह जरूरी फीचर हो सकता है। ज्यादा उम्र के लोगों के लिए प्रीमियम की दरें भी ज्यादा होती हैं। को-पेमेंट का मतलब होता है कि क्लेम का एक हिस्सा आप भरेंगें, और एक कंपनी। को पेमेंट में आपका हिस्सा पहले से तय होता है। को पेमेंट का विकल्प लेने से प्रीमियम कम हो जाता है। को-पेमेंट फीचर कुछ राहत देता है।

क्या कवर होगा और क्या नहीं, इसे समझ लें
हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा?

निवेश करने से पहले तुलना करें
प्रीमियम राशि की तुलना हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के साथ हमेशा की जानी चाहिए जो समान लाभ प्रदान करते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि आप अपनी हेल्थ इश्यारेंस पॉलिसी से अधिकतम लाभ प्राप्त करें।

अस्पतालों का नेटवर्क 
किसी भी हेल्थ प्लान में निवेश करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप योजना के तहत आने वाले नेटवर्क अस्पतालों पर विचार किया है। नेटवर्क अस्पताल अस्पतालों का एक समूह हैं जो आपको अपनी वर्तमान हेल्थ प्लान को भुनाने की अनुमति देता है। हमेशा उसी प्लान के लिए जाएं जो आपके क्षेत्र में अधिकतम नेटवर्क अस्पताल प्रदान करता है अन्यथा आपका निवेश आपात स्थिति के समय में काम में नहीं आएगा।

लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान न लें
अस्पताल में प्राइवेट रूम के किराए जैसी लिमिट से बचें। आपके लिए यह जरूरी नहीं है कि इलाज के दौरान आपको किस कमरे में रखा जाए। खर्च के लिए कंपनी द्वारा लिमिट या सब लिमिट तय करना आपके लिए ठीक नहीं है। पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें। सब-लिमिट का आशय री-इंबर्समेंट की सीमा तय करने से है। मसलन अस्पताल में भर्ती हुए तो कमरे के किराए पर बीमित राशि के एक फीसदी तक की सीमा हो सकती है। इस तरह पॉलिसी की बीमित राशि भले कितनी हो, सीमा से अधिक खर्च करने पर अस्पताल के बिल जेब से चुकाने पड़ सकते हैं।

टर्म इंश्योरेंस में कवर होगी कोरोनावायरस से मौत
अगर किसी ऐसे व्यक्ति की मौत कोरोनावायरस के कारण हो जाती है जिसने टर्म इंश्योरेंस ले रखा है। तो इसके नोमिनी को पॉलिसी का लाभ मिलेगा। टर्म इंश्योरेंस एक तरह की जीवन बीमा पॉलिसी है जो सीमित अवधि के लिए निश्चित भुगतान दर पर कवरेज प्रदान करती है। यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु लाभ राशि नामांकित व्यक्ति को देय होती है। यह अनिश्चितता या मृत्यु की स्थिति में परिवार को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाई गयी है।

हेल्थ कवर में निवेश क्यों ?
कुछ अध्ययनों के अनुसार, भारत में चिकित्सा महंगाई (मेडिकल इंफ्लेशन) की सालाना दर करीब 17 फीसदी है। यह महंगाई के सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा है। इस तरह पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत बढ़ जाती है। इसमें सही हेल्थ इंश्योरेंस प्लान को चुनना भी अहम है। किसी की सेहत आज अच्छी हो सकती है। लेकिन, हेल्थ इंश्योरेंस को केवल बीमारी और उसके उपचार से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कोई नहीं जानता कब किस उम्र में किसी के साथ दुर्घटना हो जाए। उन स्थितियों में हेल्थ कवर मददगार साबित होता है। कम उम्र में पॉलिसी खरीदकर उसे बिना क्लेम के रिन्यू कराते रहने से कभी अचानक बीमारी आती है तो उसका सामना करने में मदद मिलती है।

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