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ब्रिटिश स्टडी में दावा- नए स्ट्रेन से 2021 में 2020 के मुकाबले ज्यादा मरीज अस्पताल में भर्ती हो सकते हैं

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23 मिनट पहले

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कार्ल जिमर और बेनेडिक्ट कैरी. यूके में मिले कोरोनावायरस के नए स्ट्रेन के बाद दुनिया के कई देश सतर्क हो गए हैं। UK के अलावा दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में ये स्ट्रेन मिला है। इधर, भारत में UK से आ रहे पैसेंजरों के लिए RT-PCR टेस्ट जरूरी कर दिया गया है। ये नया स्ट्रेन कोरोना का नया रूप है। हाल ही में ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने नए वैरिएंट पर स्टडी पब्लिश की है, जो चिंता बढ़ाने वाली है।

स्टडी में वैज्ञानिकों ने नए वैरिएंट को खतरनाक बताया है। साथ ही स्ट्रेन को रोकने के कुछ संकेत दिए है। इसमें सभी स्कूल, यूनिवर्सिटी को बंद करने और वैक्सीन के डिस्ट्रीब्यूशन में तेजी लाने की सलाह दी गई है। स्टडी के लेखक निकोलस डेविस का कहते हैं कि जिन में देशों में नया वैरिएंट मिला है, उन्हें इसे चेतावनी के रूप में लेना चाहिए।

नए साल में और ज्यादा मरीज सामने आ सकते हैं

डॉक्टर डेविस ने नए वैरिएंट से 6 महीने में होने वाले खतरे और इसे रोकने के मॉडल के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसे वैक्सीन के बिना रोकना संभव नहीं है। 2021 में 2020 से ज्यादा मरीज अस्पताल और आईसीयू में भर्ती हो सकते हैं।

नए वैरिएंट पर एक्सपर्ट्स की राय

  • लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रॉपिकल मेडिसिन में एपेडेमियोलॉजिस्ट डॉक्टर डेविस कहते हैं कि स्टडी के शुरुआती नतीजे सुकून देने वाले हैं। इस स्ट्रेन को वैक्सीनेशन बढ़ाकर ही रोका जा सकता है।
  • ये स्टडी सेंटर फॉर मैथमेटिकल मॉडलिंग ऑफ इन्फेक्शियस डिजीज ने जारी की है। फिलहाल, स्टडी को साइंटिफिक जर्नल ने रिव्यू नहीं किया है। इस तरह की स्टडी में कई तरह के मॉडल के डेटा की स्टडी की जाती है। वहीं, कुछ वैज्ञानिक इसको लेकर लैब में एक्सपेरिमेंट करते हैं।

कोरोना का नया रूप ज्यादा खतरनाक नहीं

  • स्टडी में सामने आया है कि नया वैरिएंट ज्यादा खतरनाक नहीं है। वैज्ञानिकों ने इसे दूसरे की तुलना में 56% और ब्रिटिश सरकार ने 70% खतरनाक बताया है।
  • हॉवर्ड टीएच चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एपेडेमियोलॉजिस्ट बिल हैनेज स्टडी की अप्रोच की तारीफ करते हैं। वे कहते हैं कि स्टडी में वैरिएंट के बारे में सबकुछ है।
  • हैनेज की मानें तो स्ट्रेन को लेकर जो भी जानकारी सामने आई है, वो ठोस है। वे इसके खतरे, प्रसार और घातक प्रभावों के सवालों को लेकर चिंता जाहिर करते हैं।

ये भी पढ़ें- स्टडी में दावा- आर्थराइटिस की दवा कोरोना के गंभीर मरीजों को ठीक करने में मदद कर सकती है

एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैला वायरस

  • डॉक्टर डेविस और उनके साथियों ने दूसरे की तुलना में इस वैरिएंट के तेजी से प्रसार के सबूत दिए हैं। UK के कई इलाकों में स्ट्रेन बहुत तेजी से फैला है। इसकी वजह लोगों का ट्रैवल करना और एक-दूसरे के संपर्क में आना है।
  • गूगल के एक डेटा में मोबाइल यूजर के मूवमेंट को दर्ज किया है। वैज्ञानिकों ने कई तरह के मैथमेटिकल मॉडल बनाए हैं। इसमें स्ट्रेन के फैलने की स्पीड और नए केस का पता लगाया जाता है।

तेजी से फैलता है ये नया वैरिएंट

  • वैज्ञानिक कहते हैं कि वैरिएंट तेजी से लोगों को संक्रमित करने में सक्षम है। हालांकि, वायरस का 56% तक घातक होना रफ-वर्क है। इसको लेकर अभी भी वे डेटा इकट्ठा कर रहे हैं।
  • डेविस कहते हैं कि ये प्रतिशत जितना कम होगा, हम उतने निश्चिंत रहेंगे। जो डेटा मेरे पास है, उसके हिसाब से वैरिएंट को गंभीरता से लेने की जरूरत है। ये बहुत स्ट्रांग केस है।

क्या वैक्सीन नए स्ट्रेन के प्रसार को रोकने में कारगर है

नए स्ट्रेन को रोकने में वैक्सीन कितनी कारगर है। इसपर नजर रखी जा रही है। वैक्सीन एक्सपर्ट की मानें तो वैक्सीन नए स्ट्रेन को रोकने में सक्षम है। अभी लैब में इसपर एक्सपेरिमेंट चल रहा है।

इन तरीकों से पा सकते नए स्ट्रेन पर काबू

  • वैक्सीनेशन के लिए वैज्ञानिकों ने एक मॉडल तैयार किया था। इसके तहत हर हफ्ते 2 लाख लोगों को वैक्सीन लगनी थी, फिलहाल ये काम बहुत धीरे हो रहा है।
  • डेविस कहते हैं कि अगर ये स्पीड रही तो नए स्ट्रेन को रोकना मुश्किल है। वैक्सीनेशन की संख्या बढ़ाकर हर हफ्ते 20 लाख करनी होगी और स्पीड बढ़ानी होगी। US में इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • डेविस जिस मॉडल का विश्लेषण कर रहे हैं, वह दूसरे मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है। इनमें कई मॉडल गलत साबित हो सकते हैं।

20 साल से कम उम्र के लोगों में नए स्ट्रेन का 50% खतरा

  • नेटवर्क साइंस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर एलिससेंड्रो वेसपिगनानी कहते हैं कि वैक्सीन मिलने से जितनी खुशी हो रही थी, अब इस नए वैरिएंट के आने से उतनी ही चिंता बढ़ गई है।
  • स्ट्रेन की एक-दूसरे में फैलने की क्षमता बहुत है। इसका 20 साल से कम उम्र के लोगों में खतरा 50% है। इसका मतलब कि ये बच्चों में तेजी से फैल सकता है। इस मॉडल में टीनएजर के खतरों को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है, जो इसे कमजोर बनाता है।
  • डॉक्टर हैनेज कहते हैं कि स्टडी भविष्य के खतरों को बताती है। ये पूर्वानुमान नहीं है और न ही किसी तरह की भविष्यवाणी। इसमें खतरे की आशंका जताई गई है। स्टडी का मूल आधार ही स्ट्रेन को गंभीरता से लेना है।

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