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वर्क फ्रॉम होम से साइबर हमले का खतरा बढ़ा, इससे होने वाले नुकसान की भरपाई करता है साइबर डिफेंस इंश्योरेंस

हलचल टुडे

Mar 29, 2020, 11:26 AM IST

यूटिलिटी डेस्क। कोरोनावायरस के कारण कई लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। एलिया कंसल्टिंग के सीईओ दीपक भवनानी का कहना है कि वर्क फ्रॉम के कारण बड़ी व छोटी सभी प्रकार की कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा का जोखिम बढ़ा है। कंपनियों के निजी आंकड़ों को कर्मचारी अपने घर से लैपटॉप या घर पर लगे पीसी से एक्सेस कर रहे हैं। संभव है उनमें उसी स्तर का फायरवाल या सिक्योरिटी सिस्टम न हो, जो ऑफिस वाले कंप्यूटर में होता है। ऐसे में साइबर अटैक की संभावना बढ़ जाती हैं। मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर के हैक हो जाने पर कई बार आपका डाटा करप्ट हो जाता है जिसके चलते कई बार आपको नुकसान भी झेलना पड़ता है। कंपनियों को ऐसी स्थिति में ज्यादा नुकसान हो सकता है। इस समस्या से बचने के लिए SBI जनरल इंश्यारेंस कंपनी ने साइबर डिफेंस बीमा मुहैया कराती है। यह बीमा आपके डाटा के खोने, हैकिंग के दौरान व्यापार में नुकसान होने जैसे कई रिस्क को कवर करता है।

साइबर डिफेंस बीमा से जुड़ी खास बातें

  • कंपनी के अनुसार शुरूआती फेस में यह बीमा उत्पाद छोटी कंपनियां या छोटे बिजनेस की जरूरतें पूरी करता है।
  • Cyber Defence Insurance साइबर नियमों के उल्लंघन व धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे से सुरक्षा प्रदान करता है। इसे बीमा योग्य साइबर खतरों से सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है।
  • इसमें हैकिंग के हमले, आपकी पहचान संबंधी डाटा की चोरी व संवेदनशील जानकारी के सार्वजनिक होने से बिजनेस में आने वाली परेशानी भी शामिल हैं।
  • SBI जनरल इंश्योरेंस में साइबर हमले की घटना के बाद ग्राहक को तत्काल में मिलने वाली हर जरूरी सेवाओं की भी पेशकश की जाती है। इसके तहत साइबर घटना के संदर्भ में 24*7 घंटे सेवा दी जाती है।
  • इस पॉलिसी से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें https://www.sbigeneral.in/portal/cyber-defense-insurance

साइबर अटैक से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

  • पर्सनल डिवाइस पर एप में संवेदनशील डेटा स्टोर करते समय आपके पास ऐसा सिक्युरिटी टूल होना चाहिए जो मालवेयर, रेंसमवेयर या साइबर क्राइम का पता लगा सके। घर के नेटवर्क में इसके लिए अक्सर फायरवॉल और एनक्रिप्शन का उपयोग किया जाता है। फायरवॉल डिवाइस, एप्लीकेशन को साइबर हमले से बचाती है। या ऐसी कोई वेबसाइट जो आपके नेटवर्क में सेंध लगाने की कोशिश करती है उसका पता लगाकर उसे रोकती है। पब्लिक वाई-फाई से जुड़ना भी स्मार्टफोन और एप के लिए जोखिम की वजह बन सकता है।
  • साइबर अपराधी अक्सर ई-मेल के जरिए फिशिंग हमले करते हैं। यूजर को ऐसे ई-मेल असली लगते हैं लेकिन वह फर्जी होते हैं। इनसे बचने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि अज्ञात सोर्स वाले ई-मेल या किसी अज्ञात वेबसाइट की अचानक खुलने वाली पॉप-अप विंडो में दी लिंक को क्लिक न करें। न ही डाउनलोड लिंक पर क्लिक न करें। अज्ञात वेबसाइट पर अपना ई-मेल रजिस्टर्ड करने से बचें। कोई वेबसाइट सही है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए वेबसाइट के नाम के आगे देखें कि https:// लगा या नहीं।
  • हर प्लेटफॉर्म पर पासवर्ड मजबूत बनाएं। पासवर्ड में अल्फा-न्यूमरिक के साथ-साथ स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल करें। अलग-अलग अकाउंट पर एक ही पासवर्ड इस्तेमाल न करें। किसी एक वेबसाइट पर पासवर्ड लीक हो गया तो कोई दूसरा आपके दूसरे अकाउंट में सेंध लगा सकता है। किसी भी दूसरे व्यक्ति को अपना पासवर्ड देने से बचें।
  • सुरक्षा के तमाम उपाय करने के बावजूद हैकर्स साइबर क्राइम के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसे देखते हुए साइबर-इंश्योरेंस बीमा कवर लेना अब जरूरत बन गया है। एक कॉम्प्रिहेंसिव साइबर इंश्योरेंस कवर विभिन्‍न प्रकार के साइबर जोखिम के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। इनमें आईडेंटिटी की चोरी, मालवेयर अटैक, आईटी चोरी से नुकसान, साइबर एक्सटोर्शन आदि शामिल हैं। यह बीमा ई-मेल स्पूफिंग और फिशिंग से होने वाले नुकसान भी सुरक्षा मुहैया कराता है। ऐसे किसी नुकसान के मामले में बचाव के लिए कानूनी खर्च, डेटा या कंपयूटर प्रोग्राम रि-इन्स्टाल करवाने आदि के खर्च पर भी बीमा कवर उपलब्ध होता है।

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