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आरक्षण लागू हुआ तो 122 साल बाद होशंगाबाद को मिली थी पहली महिला नपाध्यक्ष

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होशंगाबाद20 मिनट पहले

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  • आज भोपाल में होशंगाबाद नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए होगा आरक्षण, इस मौके पर जानिए इससे जुड़े तथ्यों के बारे में

नगरपालिका चुनाव के लिए अध्यक्ष पद का आरक्षण बुधवार काे भोपाल में होगा। वार्डाें का आरक्षण पहले ही हाे गया है। आपको बता दें कि आरक्षण ही है जिसके लागू होने पर होशंगाबाद को 122 साल बाद पहली महिला नपाध्यक्ष मिली थी।

1873 में हाेशंगाबाद नपा गठित हुई। तब से 1994 तक 24 पुरुष ही नपाध्यक्ष रहे। 1994 में आरक्षण लागू हुआ। इसके बाद 3 जनवरी 1995 को सुशीला तिवारी के रूप में पहली महिला नपाध्यक्ष होशंगाबाद को मिली। उनका कार्यकाल सवा साल का रहा। फिर मीना वर्मा नपाध्यक्ष बनी और कार्यकाल पूरा किया।

पार्षदों का रहता था दखल, नहीं ले पाती थी निर्णय : मीना वर्मा

दूसरी महिला नपाध्यक्ष रहीं मीना वर्मा ने बताया तब अध्यक्ष का चुनाव पार्षद करते थे। अध्यक्ष बंधन में रहता था। वह अपने मन से काेई निर्णय नहीं ले सकता था। पार्षदों के बताए अनुसार ही काम करना हाेता था। अध्यक्ष बनी थी तब कई चुनाैतियां थी।

मैंने मजबूती से काम किया। मालाखेड़ी में काॅम्प्लेक्स व बाजार बनवाया। पहले बहुत कम दुकानें थी। मैंने पार्षद चुनाव निर्दलीय लड़ा था। दिग्विजय सिंह की सरकार थी। उन्हाेंने कहा कि जाे निर्दलीय जीतेगा वह हमारा अध्यक्ष हाे जाएगा। इसलिए अध्यक्ष बनने के बाद मैंने कांग्रेस ज्वाइन की।

एक दौर ऐसा भी था

बिना चुनाव लड़े पार्षद बाहरी व्यक्ति को चुन लेते थे अध्यक्ष

1994 से पहले नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव पार्षद ही करते थे। वे बाहरी व्यक्ति काे भी चुन सकते थे। यानी जिसने पार्षद पद का चुनाव नहीं लड़ा, वे अध्यक्ष के लिए फार्म भरते थे और पार्षदाें के वाेट से अध्यक्ष बनते थे।

इसी प्रक्रिया से फरवरी 1979 में अध्यक्ष बने पं. गिरिजाशंकर शर्मा ने बताया उस समय यह प्रक्रिया यही रहती थी, इसमें पार्षद ही अध्यक्ष काे चुनते थे। इनके अलावा श्रीराम राठाैर, जिनवरदास फाैजदार, कैलाश दुबे सहित अन्य भी नपा अध्यक्ष रहे हैं। इन्हें भी पार्षदाें के माध्यम से अध्यक्ष चुना गया था।

1995 में बनी पहली महिला नपाध्यक्ष

आरक्षण के बाद पहलीबार 1995 में पहली अध्यक्ष सुशीला तिवारी बनी। हालांकि वे एक साल के अंदर वे हट गईं। फिर चुनाव हुए। पार्षदाें ने मीना वर्मा काे अध्यक्ष चुना। वे 1999 तक अध्यक्ष रहीं। इसके बाद नियम बदल गए और जनता के द्वारा सीधा अध्यक्ष चुना जाने लगा।

ये भी बदलाव : 2007 में महिलाओं को 50% आरक्षण

2007 में स्थानीय निकाय चुनाव में सशाेधन कर महिलाओं का आरक्षण 50% कर दिया गया। आधे पद महिलाओं के लिए आरक्षित होते हैं।

नपा चुनाव 1981 से 1994 तक नहीं हुए। 13 साल तक चुनाव नहीं हुए। कैलाश चंद्र दुबे 16 मार्च 1981 में अध्यक्ष बने थे, उनका कार्यकाल 30 जनवरी 1983 तक रहा। फिर सीधे 1994 में फिर चुनाव हुए। तब तक प्रशासक नियुक्त रहे। अब पिछले 10 माह से प्रशासक ही नगरपालिका चला रहे हैं।

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