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इंदौर, भोपाल में और होगी सख्ती, 20 अन्य संक्रमित जिलों में हॉट स्पॉट होंगे सील, शहरों और कस्बों में अलग-अलग समय में दी जा सकती है छूट

  • प्रदेश में 22 जिलों में संक्रमित मरीज मिल चुके हैं संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री आज शाम तक लॉक डाउन बढ़ाए जाने की घोषणा कर सकते हैं
  • इस बार लॉक डाउन में कुछ ढील दा सकती है। शहरों के अलग-अलग क्षेत्रों में समय निर्धारित कर ये छूट दी जाएगी

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 09:15 AM IST

भोपाल. लॉक डाउन का आज 19वां दिन है। अब तक 518 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। मौत का आंकड़ा भी 36 तक पहुंच गया है। लॉक डाउन की वजह से घरों में कैद लोग परेशान हो गए हैं। अपने आपको सुरक्षित रखने के लिए कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। इधर, 30 अप्रैल तक लॉक डाउन बढ़ना तय माना जा रहा है, घोषणा होना बाकी है। प्रदेश में 22 जिलों में संक्रमित मरीज मिल चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि मुख्यमंत्री आज शाम तक लॉक डाउन बढ़ाए जाने की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि इस बार वे कुछ मामलों में छूट दे सकते हैं। 

बताया जा रहा है कि शनिवार को प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्रियों की बैठक में ये निर्देश दिए हैं कि लॉक डाउन की समय सीमा बढ़ाए जाने की घोषणा से पहले ऐसी व्यवस्था कर दें कि लोगों को सभी जरुरत का सामान मिल सके औऱ उनको परेशान नहीं होना पड़े। इसलिए प्रदेश सरकार दूर-दराज के इलाकों में जरूरत का सामान आज शाम तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इसलिए परिवहन विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि जिले की सीमाओं पर सामान लेकर जा रहे ट्रकों को रोका नहीं जाए। ये भी बताया जा रहा है कि इस बार लॉक डाउन में कुछ ढील दा सकती है। शहरों के अलग-अलग क्षेत्रों में समय निर्धारित कर ये छूट दी जाएगी। इससे ये फायदा होगा की बाजारों में लगने वाली अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित किया जा सकेगा। बताया जा रहा है कि इस बार जो लॉक डाउन को बढ़ाया जाएगा उसमें इंदौर, भोपाल सहित ज्यादा संक्रमण वाले जिलों की सीमाएं पहले की तरह सील रहेंगी। जिन जिलों में मरीजों की संख्या कम है वहां सिर्फ तीन किलोमीटर में घोषित किए गए निषेध क्षेत्र को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा। लोगों को परेशानी नहीं हो इसके लिए लोगों को घर तक सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति की जाएगी।  

ये नजारा पुराने शहर के एक सब्जी विक्रय केंद्र का है। जहां लोग बिना सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किए सब्जी खरीद रहे हैं। परेशानी ये भी है कि जब यहां लोगों को कोई समझाता है तो लड़ने पर उतारू हो जाते हैं।

लॉक डाउन के पूरे प्रदेश से तरह-तरह के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों को सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। जिनकी डिलेवरी का समय हो गया है उन्हें मदद नहीं मिल पा रही है। परिजन परेशान हैं। सरकार ने दवाईयों की दुकान खुले रखने की इजाजत दी है। लेकिन लॉक डाउन के कारण लोगों को घर से नहीं निकलने दिया जा रहा है। इसलिए वे दवा तक नहीं खरीद पा रहे हैं। ये भी एक मुश्किल ही है कि लोगों को जहां मौका मिलता है। लॉक डाउन का उल्लंघन करने लगते हैं। 

प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को अस्पताल पहुंचाया

ग्वालियर में आधी रात को प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को पुलिस ने अपनी एफआरवी से अस्पताल भिजवाया। एंबुलेंस को आने में देर लग रही थी, इसलिए पुलिस खुद ही प्रसूता को लेकर अस्पताल पहुंच गई। हजीरा स्थित चार शहर का नाका के रहने वाले अजय सिंह चौहान की पत्नी को साढ़े आठ माह का गर्भ था। रात करीब 1 बजे अचानक प्रसव पीड़ा उठी। घर के बाहर न कोई ऑटो थी न कोई अन्य इंतजाम। अजय ने पहले एंबुलेंस को कॉल लगाया। एंबुलेंस को आने में देर लग रही थी। अजय ने 100 नंबर डायल किया। एफआरवी के कंट्रोल रूम से तुरंत हजीरा थाने की एफआरवी को मैसेज मिला। उसके घर पहुंच गए। प्रसूता को तत्काल अस्पताल ले गए। अस्पताल में कुछ देर बाद उसने बच्चे को जन्म दिया। अगर कुछ देर महिला को अस्पताल न ले जाते तो डिलीवरी घर पर ही हो जाती।  

ग्वालियर में बीती रात एक महिला को प्रसव पीड़ा होने लगी। पति ने एंबुलेंस को फोन किया वो नहीं आई। इसके बाद पति ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस की गाड़ी महिला के घर पहुंची और उसे अस्पताल पहुंचाया।

ग्वालियर में भर्ती कोरोना संदिग्ध एंबुलेंस से समधी के साथ भागा

ग्वालियर से कोरोना संदिग्ध एक मरीज अपने समधी की मदद से एंबुलेंस बैठकर चुपचाप भागकर भिंड आ गया। यह सूचना जैसे ही ग्वालियर से भिंड जिला प्रशासन को मिली तो हड़कंप मच गया। आनन फानन में ग्वालियर से आने वाले सभी रास्तों पर नाकाबंदी गई। तभी एक एंबुलेंस को पुलिस ने पकड़ा, जिसके चालक ने बताया कि वह ग्वालियर से एक मरीज को रौन के देवजू का पुरा में छोड़कर आई है। ऐसे में तत्काल रौन पुलिस ने देवजू का पुरा में दबिश दी, जहां उक्त मरीज घर के अंदर चारपाई पर लेटा हुआ मिला। ग्वालियर पुलिस को इस संबंध में सूचना दी गई। साथ ही ग्वालियर पुलिस उक्त मरीज और उसका भागने में सहयोग करने वाले रिश्तेदारों को अपने साथ ग्वालियर लेकर गई। जहां उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। जो युवक भागा था, उसका पैर टूटा था और प्लास्टर चढ़ा हुआ था। दरअसल शनिवार की सुबह 10 बजे के करीब देवजू का पुरा निवासी वकील प्रसाद (60) पुत्र छोटे लाल दौहरे अपने समधी, दामाद के साथ चुपचाप ग्वालियर से एंबुलेंस के माध्यम से भाग आया। एसपी ने तत्काल ग्वालियर से आने वाले सभी रास्तों पर नाकाबंदी बढ़ा दी। मालनपुर टीआई अशोक गौतम ने भिंड से ग्वालियर जाती हुई एक एंबुलेंस एमपी को पकड़ा, जिसने बताया कि वह ग्वालियर जेएएच अस्पताल से एक मरीज को देवजू का पुरा में छोड़कर लौट तत्काल मछंड चौकी प्रभारी पंकज मुदगल व फोर्स लेकर देवजू का पुरा में दबिश दी। जहां वकील प्रसाद घर के अंदर चारपाई पर लेटा हुआ मिला। तब पुलिस ने राहत की सांस ली और ग्वालियर पुलिस को सूचना भेजी।

ग्वालियर से कोरोना संदिग्ध एक मरीज अपने समधी की मदद से एंबुलेंस बैठकर चुपचाप भागकर भिंड आ गया। पुलिस ने उसे घर से आराम करते हुए पकड़ा और फिर अस्पताल पहुंचाया।

भिंड में ओपीडी बंद होने से गर्भवती महिलाओं का नहीं हो पा रहा रुटीन चेकअप
कोरोना संक्रमण को लेकर जिले में चल रहे लॉकडाउन के तमाम साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के चलते शासन स्तर से सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद कर दिए जाने के बाद डॉक्टर्स ने भी मरीजों से दूरी बनाना शुरू कर दिया है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और पेट संबंधी विकार से जूझ रही महिला मरीजों की बढ़ गई है। जिला अस्पताल के साथ महिला डॉक्टर्स के निजी क्लीनिक भी बंद होने के चलते वे घर पर भी दर्द सहन करने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं के सामने हैं, जिन्हें नियमित चेकअप कराने के लिए डॉक्टर्स नहीं मिल रही हैं। स्थिति यह है कि जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग में भी इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। जबकि जिला अस्पताल के प्रसूति विभाग में सात महिला चिकित्सक हैं। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा पिछले एक महीने से बंद है। जबकि जिला अस्पताल में दो अल्ट्रासाउंड मशीनें हैं, जिसमें से एक मशीन का शुभारंभ ही नहीं हो सका है। दूसरी मशीन का एडप्टर खराब बताया जा रहा है, जिसे अस्पताल प्रबंधन एक महीना गुजरने के बाद भी नहीं मंगा पाया है। 

कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सभी लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिला और प्रसूताओं को हो रही है। डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहे हैं।

फैक्टरी बंद हुई तो इंदौर से अपने घर सागर जाने रेल पटरी के किनारे पैदल ही चल दिए

सीहोर में पुलिस ने रेल की पटरी पर चलते हुए छह लोगों को पकड़ा है। लॉकडाउन के चलते धार में ग्रीन नेट बनाने वाली फैक्टरी बंद हुई तो यहां पर काम करने वाले गंजबसौदा, विदिशा और सागर के लोग किसी तरह इंदौर तक पहुंच गए। इनके साथ महिलाएं भी थीं। इन सभी को इंदौर में रोका गया था। किसी तरह यह चार दिन पहले इंदौर से  निकलकर 178 किमी का सफर तय कर सीहोर रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो यहां पर इन्हें जीआरपी ने पकड़ लिया। इसके बाद जब इनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि वह रेलवे पटरी पर चलते हुए इंदौर से यहां तक पहुंचे हैं। सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम रेलवे स्टेशन पहुंची और डॉक्टरों ने इन सभी के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। ये सभी स्वस्थ हैं और बाद में इन्हें रैन बसेरा भेज दिया गया। युवकों ने बताया कि वे इंदौर से सीहोर मक्सी होते हुए पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि उनके साथ कुछ महिलाएं भी थीं जो इंदौर में रुक गईं। ये सभी छह युवक विदिशा के गंजबसौदा और सागर के हैं। सभी इंदौर से पैदल निकले लेकिन सड़क मार्ग से नहीं बल्कि रेलवे ट्रैक के सहारे यहां तक पहुंचे थे। यहां पर जीआरपी पुलिस ने इन्हें देखा और पकड़ लिया। इसके बाद जिला अस्पताल से स्वास्थ्य अमले ने इनका चेकअप किया और स्वस्थ्य होने के कारण इन्हें रैन बसेरा भेज दिया गया।

रतलाम में कोरोना पॉजिटिव अस्पताल से भाग गया था घर

रतलाम के मोचीपुरा के एक फुटवियर व्यापारी का सैंपल पॉजिटिव आया है। अब सभी का सख्ती से घरों में रहना ही बेहतर है। ऐसा इसलिए क्योंकि फुटवियर व्यापारी लॉकडाउन में घर से दान दिया करता था। मामले में प्रबंधन की चूक भी सामने आई है क्योंकि वो अस्पताल से 6 अप्रैल को भाग गया था। फुटवियर व्यापारी के पॉजिटिव होने की खबर मिलते ही प्रशासन सहित स्वास्थ्य विभाग का अमला अलर्ट हो गया। शनिवार को ही 5-5 लोगों की 8 टीमें बनाकर क्षेत्र में सर्वे करवाया गया। क्षेत्र में घर-घर पहुंची टीम को लोगों ने अहम जानकारी भी दी है कि कोरोना पॉजिटिव फुटवियर व्यापारी अपने घर से दानकर्म किया करता था। चूंकि, इनका घर मेन रोड पर था ऐसे में वे घर से ही लोगों को सामग्री देते थे।  इधर, मामले में एक चूक भी सामने आई है। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति को सैंपल लेने से पहले जिला अस्पताल के मेल मेडिकल वार्ड में रखा था। वह व्यक्ति वार्ड से अपने घर चला गया था। इसकी जानकारी मिलने पर अस्पताल का ही स्टाफ मरीज को घर से दोबारा लाया था और मेडिकल कॉलेज में आइसोलेट किया था। कोरोना पॉजिटिव परिवार के संपर्क में रहे 64 लोगों को देर रात तक क्वारंटाइन कर दिया गया। परिवार के 14 लोगों को मेडिकल कॉलेज में रखा गया है। 

अस्पताल से भागे जूता व्यापारी को फिर से अस्पताल पहुंचाया गया है।

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