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डीन का दावा- एक भी वॉलंटियर की वैक्सीन लगने के बाद तबीयत नहीं बिगड़ी, मौत पॉइजनिंग से; पीएम रिपोर्ट में सच सामने आएगा

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भोपालएक दिन पहले

रविवार को प्रेस कांफ्रेंस टालने के दूसरे दिन पीपुल्स अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस कांफ्रेंस कर अपनी बात रखी।

  • पूरा डाटा भारत सरकार की अधिकृत एजेंसी को ऑनलाइन जाता है
  • वॉलंटियर के प्रेस कांफ्रेंस पीपुल्स मेडिकल कॉलेज ने अपना पक्ष रखा

पीपुल्स अस्पताल में कोवैक्सिन ट्रायल में शामिल होने वाले वॉलंटियर के प्रेस कांफ्रेंस कर प्रबंधन पर गंभीर आरोपों लगाने के दिन बाद अब पीपुल्स अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई दी है। पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित ने कहा कि ट्रायल को लेकर भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। साफतौर पर कहना चाहता हूं कि अब तक वैक्सीन ट्रायल में शामिल एक भी वॉलंटियर बीमार नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि हम देश हित में कार्य कर रहे हैं। आरोप लगाने वाले अगर सच्चे हैं तो कानून की मदद लें। इसके लिए कई प्लेटफार्म हैं। उनमें जाकर शिकायत करें। हमने पूरी ईमानदारी से इस काम को किया है, इसलिए हम किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर उनकी साजिश के कारण हमारे कार्यक्रम पर असर पड़ता है, तो फिर हम उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए जाएंगे। इसी तरह के कई और सवालों के जबाव दीक्षित ने दिए।

सवाल : क्या कोवैक्सिन के कारण दीपक की मौत हुई?

जवाब : पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी फैलियर है, जो सस्पेक्टेड पॉइजनिंग के कारण हुआ है। वैक्सीन के कारण कोई मौत नहीं हुई है। यह हम दावे से कह सकते हैं। हमने उनका लगातार सात दिन तक फालोअप लिया था, लेकिन उन्होंने कोई बीमारी नहीं बताई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सब साबित हो जाएगा।

सवाल : सबसे ज्यादा वॉलंटियर गरीब बस्तियों से ही क्यों?

जवाब : गाइड लाइन के अनुसार अस्पताल के 4 किमी के दायरे के लोगों को ही शामिल करना था, ताकि फालोअप अच्छे से हो सके। आईएमआर की गाइड लाइन के अनुसार ही वॉलंटियर को लिया गया है।

सवाल : ट्रायल में शामिल लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं?

जवाब : हमारी जानकारी में अब तक कोई नहीं है, जिसे टीका लगने के बाद किसी तरह की कोई गंभीर साइड इफेक्ट नजर आए हों। कुछ लोगों को नॉर्मल समस्या आई हैं। यह पूरी तरह से ब्लाइंड ट्रायल होने के कारण यह पता नहीं है कि वॉलंटियर को वैक्सीन लगा या प्लेसिबो। इसलिए ट्रायल पूरा होने के बाद ही वैक्सीन के साइड इफेक्ट के बारे में पता चल पाएगा।

सवाल : किसी तरह से इस पूरे ट्रायल कार्यक्रम की मॉनिटरिंग हो रही है?

जवाब : भारत बायोटेक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के संयुक्त तत्वाधान में तैयार कोवैक्सिन का फेज-3 ट्रायल देश के विभिन्न भागों में नवंबर माह में शुरू हुआ था। भोपाल के पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर से संबद्ध है, को ट्रायल के लिए चयनित किया गया। ट्रायल को पूरा डाटा ऑन लाइन दोनों जगह जा रहा है। वही निर्धारित करते हैं कि किसे कौन सा टीका लगना है।

सवाल : कार्यक्रम को लेकर सवाल उठाने वालों के खिलाफ काई कार्रवाई करने जा रहे हैं क्या?

जवाब : अभी इसके बारे में सोचा नहीं है। हम अपना कार्य कर कर रहे हैं।

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