Home राज्य प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश हो सकते हैं निरस्त

प्रदेश भर के सभी विश्वविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश हो सकते हैं निरस्त

  • कुलपतियों ने फोन पर बातचीत कर बनाई सहमति, सुझाव राजभवन भेजे जाएंगे

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 05:26 AM IST

ग्वालियर. कोरोना संक्रमण के भय से प्रदेश भर की यूनिवर्सिटियों में 22 मार्च से लॉकडाउन है। इससे अध्ययन से जुड़े सभी काम पूरी तरह से बंद पड़े हुए हैं। यूनिवर्सिटी से जुड़े अफसर इसे लेकर चिंतित हैं, उनकी चिंता यह है कि छात्रों की डिग्री समय पर पूरी कैसे होगी यानि जो छात्र अंतिम वर्ष में हैं उनकी परीक्षा कराकर उनका रिजल्ट कैसे घोषित होगा। उनकी डिग्री पूरी करने में होने वाली देरी उनके करियर पर भी असर डाल सकती है। इसे लेकर प्रदेश की सभी परंपरागत यूनिवर्सिटी के कुलपतियों ने बात की है। इसमें एक सुझाव यह भी आया है कि इस बार यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के ग्रीष्मावकाश निरस्त कर दिए जाएं। अभी लॉकडाउन की वजह से अवकाश चल रहे हैं, ऐसे में ग्रीष्मावकाश की आवश्यकता नहीं है। इसके अलावा भी अन्य सुझाव आए हैं अब इन सुझावों को लेकर एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की जाएगी और इसके बाद इन्हें राजभवन और उच्च शिक्षा विभाग भेजा जाएगा ताकि इनको अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू हो सके। 
कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन ऐसे समय आया जब प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटी में परीक्षाएं चल रही थीं और कुछ कोर्स़ों की परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं। इसके बाद रिजल्ट और सत्र समाप्त होता। लेकिन अब जो परीक्षा चल रही थीं वह पूरी नहीं हो पाईं, जो परीक्षाएं अप्रैल से शुरू होने वाली थीं उनमें भी अड़ंगा लग गया। मूल्यांकन अौर इसके बाद रिजल्ट तैयार कराने में परेशानी आएगी और सत्र जुलाई तक चल सकता है। इसलिए अब ग्रीष्मावकाश स्थगित कर देने का सुझाव आया है ताकि लॉकडाउन समाप्त होते ही मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार कराने का काम पूरा हो सके और जिन कोर्सों की परीक्षा आने वाले दिनों में होना है उनके प्रैक्टिकल और आंतरिक मूल्यांकन का कार्य भी इस दौरान पूरा करा लिया जाए। 

सुझावों में यह भी शामिल
आने वाले महीनों में ज्यादातर यूनिवर्सिटी में नैक निरीक्षण होना था और इसके बाद ग्रेडिंग तय की जाना थी। लॉकडाउन की वजह से अभी काम व्यवस्थित न होने की वजह से नैक निरीक्षण को 8 महीने आगे बढ़ाने का भी सुझाव आया है। इसके अलावा यूजीसी द्वारा यूटिलिटी सर्टिफिकेट लिए जाने का काम भी अभी नहीं हो पा रहा है इसलिए इसे भी आगे बढ़ाया जाए। जिन कोर्सों में आंतरिक मूल्यांकन होना बाकी रह गया है उनके छात्रों के ऑनलाइन असाइनमेंट लेकर लॉकडाउन के दौरान ही इस कार्य को पूरा कर लिया जाए।

मूल्यांकन के लिए शिक्षकों के घर पहुंचा दीं कॉपियां लेकिन कुछ शिक्षक संक्रमण के डर से बंडल नहीं खोल रहे

जीवाजी यूनिवर्सिटी ने बीए, बीएससी, बीकॉम अंतिम वर्ष की परीक्षा मार्च के पहले सप्ताह में शुरू करा दी थीं। लॉकडाउन शुरू होने से पहले इन कोर्सों के 5 पेपर हो गए थे, इनमें से कुछ विषयों की कॉपियां जेयू प्रबंधन ने नोडल केंद्र बनाए गए लीड कॉलेजों के माध्यम से शिक्षकों के यहां पर मूल्यांकन के लिए भेजी हैं। पहले तो इन शिक्षकों ने घर पर कॉपी मंगाने से इनकार ही कर दिया लेकिन जैसे-तैसे कॉपियां भेजी गईं तो कुछ शिक्षक काॅपी का बंडल खोलने से ही डर रहे हैं। उन्होंने अपने डर से नोडल केंद्र प्रभारी साइंस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएल अहिरवार को भी अवगत कराया है। 
जेयू प्रबंधन की योजना है कि जब तक लॉकडाउन समाप्त नहीं होता है तब तक ऐसे सारे काम पूरे करा लिए जाएं,जिन्हें घर पर बैठकर किया जा सकता है। लॉकडाउन से पहले योजना बनाई गई थी कि केंद्रीय मूल्यांकन करवाया जाए और समय पर रिजल्ट घोषित किया जाए। लेकिन लॉकडाउन के बाद ऐसा संभव नहीं हो सका। इसके बाद तय किया गया कि कॉपियां शिक्षकों के घर पर मूल्यांकन के लिए भेज दी जाएं । इसके चलते ही पिछले एक सप्ताह में शिक्षकों के घर कॉपियां भेजी गई हैं। मूल्यांकन के लिए शिक्षकों के नाम उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी लीड काॅलेज साइंस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. बीएल अहिरवार को सौंपी थी। उन्होंने शिक्षकों से बात की तो कुछ शिक्षकों ने सहमति दे दी जबकि कुछ शिक्षकों का कहना था कि कोरोना संक्रमण की वजह वह अभी बाहर की काेई चीज घर में नहीं ला रहे हैं ऐसे में कॉपियाें के साथ संक्रमण आ गया तो क्या होगा, इसलिए उनके यहां बंडल नहीं भेजे जाएं। इसके बाद भी कॉपियों के बंडल भेज दिए गए अब यह शिक्षक बंडल खोलने को ही तैयार नहीं हैं। 

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