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मध्यप्रदेश से दालों की निकासी बंद रहेगी?

  • हाल ही में प्रशासन ने चुनिंदा दाल मिलों को उत्पादन की छूट दी

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 03:19 AM IST

इंदौर. हाल ही में प्रशासन ने चुनिंदा दाल मिलों को उत्पादन की छूट दी है। अन्य सभी दाल मिलों एवं दाल-चावल व्यापारियों को छूट देने में कौन-सी परेशानी आ रही है। यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इंदौर में बनी दालें मप्र के बाहर नहीं जा सकेगी या नहीं। मप्र के गांव-गांव में दालों की कमी है। इनकी आपूर्ति में काफी समय लग जाएगा। इंदौर में सामान्यत: तुअर, मसूर, मूंग एवं चना दाल का चलन अधिक है, जबकि उड़द मूंग मोगर का कम मात्रा में। जिन मिलों को उड़द- मूंग मोगर के उत्पादन की छूट दी गई है, उनकी उत्पादन क्षमता अधिक है। ऐसी स्थिति में मिलें क्या करेंगी? वैसे भरे हुए ट्रक आने-जाने पर पाबंदी नहीं है। उड़द-मूंग मोगर चलाने वाली मिलों का माल पूर्व से ही प्रदेश के बाहर अधिक मात्रा में जाता रहा है।
95 प्रतिशत कारोबार में भी होलसेल से
सामान्यत: व्यवहार में दाल मिलों से 95 प्रतिशत सेमी होलसेल व्यापारी खरीदी करते हैं और सेमी होलसेल से किराना वाले इनके बीच नकद-उधारी का कारोबार वर्षों से चला आ रहा है? क्या प्रशासन चाहता है कि कालानीनगर, बाणगंगा तरफ के किराना व्यापारी दाल लेने उद्योग नगर आए। यहां से आने-जाने का रिक्शा भाड़ा कितना लगेगा, इसकी कल्पना की गई है। वैसे ही दालें थोक में 95 से 100 रुपए किलो था इससे कम-ज्यादा भाव पर बिक रही है। प्रशासकीय अधिकारियों को चैन बनाने के बजाय चैन तोड़ने में कौन-सा मजा आ रहा है, यह समझ से परे है। दाल-चावल सेमी होलसेल के दो प्रमुख सेंटर है, छावनी क्षेत्र एवं मल्हारगंज-इंदौर के आधे भाग में छावनी से एवं पश्चिमी भाग में मल्हारगंज से आपूर्ति हो सकती है। बशर्तें सभी सेभी होलसेल व्यापारियों को दुकानें खोलने की अनुमति दे दी जाए। शहर के किराना वालों के किसी न किसी व्यापारी के यहां उधारी खाता है। खेरची व्यापारी  ग्राहक के घर सामान पहुंचा पाएगा या नहीं यह अहम सवाल आज भी खड़ा है?
डबल डॉलर चने में तूफानी तेजी
डबल डॉलर चने की मांग निकलने से भावों में तूफानी तेजी आ गई है। मप्र सरकार व्यापारियों को सीधे खरीदी की अनुमति दे तो तेजी का लाभ किसानों को मिल सकता है। वर्तमान में मंडियां बंद होने से डॉलर चने की आवक नहीं है। इस वजह से भी भाव अधिक बढ़ गए हैं। दालों की आपूर्ति घटने से घरेलू मांग निकली है। 10-15 कंटेनरों के निर्यात कामकाज भी हुए हैं। मुंबई से 22 मार्च तक निर्यात हुआ था, उसके बाद से बंद है। हाल ही में मुंद्रा एवं दुबई बंदरगाह से सप्ताह में 1-2 दिन लदान का कार्य होने लगा है। इंदौर से ट्रक भाड़े 150 रुपए से बढ़कर 250 रुपए हो गए हैं। वैश्विक मांग से मैक्सिको डॉलर चने के भाव 1100 से 1150 डॉलर से बढ़कर 1200 से 1250 डॉलर प्रति टन अल्जीरिया, यूरोप के कुछ देशों के लिए हो गए हैं। इंदौर में डॉलर चना 42X40-6900 रुपए 49X46-6700 रुपए 58X60-5900 रुपए के भाव बताए गए अर्थात् केवल 20 प्रतिशत फसल आई है, 80 प्रतिशत किसानों के पास है। तेजी बनी हो तो बेचवाली का दबाव बढ़ सकता है। घरेलू बाजार में डॉलर की खपत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा आदि में सर्वाधिक माल में होती है, जबकि घरेलू में कम। वर्तमान में दालों की कमी से डॉलर चने में मांग निकली है। दालों की उपलब्धि सुगम होने के बाद घरेलू मांग कम पड़ सकती है।

चैन को बनाए रखें
सेमी होलसेल दाल मिलों से खरीदी कर लेंगे और किराना व्यापारी सेमी होलसेल से। इनके बीच की कड़ी में केवल एक रिक्शावाला होगा अर्थात् इतने लंबे नेटवर्क में कहीं भी भीड़ नहीं है। बताया जाता है कि तुअर दाल 5, मसूर दाल 3, चना दाल 2, उड़द मोगर 2 एवं 2 मूंग मोगर की मिलें हैं। उड़द-मूंग मोगर की 1-1 मिल को अनुमति दी जाती तब भी उत्पादित माल की बिक्री का टोटा पड़ता। पता नहीं अधिकारियों की सोच क्या है? यह तो निश्चित है कि आने वाले दिनों में दालों में हो रही कालाबाजारी पर रोक लगेगी।

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