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2005 में कोरोना महामारी को लेकर बाबा ने कर दी थी भविष्यवाणी, लातूर में आए भूकंप के दौरान इंदौर में होते हुए भी बाबा लातूर में कर रहे थे पीड़ितों की सेवा

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इंदौर15 मिनट पहलेलेखक: राजीव तिवारी

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बर्फानी बाबा को मेहंदीपुर बाला जी स्थित आश्रम में समाधि दी जाएगी।

बर्फानी बाबा महाराज बुधवार देर रात अहमदाबाद में ब्रह्मलीन हो गए। गुरुवार को उनकी पार्थिव देह मेहंदीपुर बालाजी स्थित आश्रम में लाई गई। यहां शुक्रवार को आश्रम में उनको समाधि दी जाएगी। बर्फानी बाबा के अंतिम दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में भक्त आश्रम पहुंचे हैं। इंदौर से भी सैकड़ों की संख्या में भक्त बाबा के दर्शन को रवाना हुए हैं। भक्तों का दावा है कि कुछ दिन पहले ही बाबा ने अपना समाधि स्थल मेहंदीपुर बालाजी में बनाने के लिए कहा था। यहां उनका आश्रम भी है। बाबा का एक आश्रम इंदौर में भी है, जो बर्फानीधाम के नाम से प्रसिद्ध है।

बाबा वैसे तो हमेशा भ्रमण पर ही रहते थे, लेकिन वे इंदौर आश्रम में भी भक्तों को समय दिया करते थे।

बाबा वैसे तो हमेशा भ्रमण पर ही रहते थे, लेकिन वे इंदौर आश्रम में भी भक्तों को समय दिया करते थे।

इंदौर बर्फानी धाम आश्रम के सेवक पुरुषोत्तम यादव ने बताया कि बाबा जी हिंदुस्तान के सिद्ध संतों में से एक थे। वे प्रचार-प्रसार से दूर रहते हुए सरल जीवन जीने वाले महात्मा थे। उनके जन्म को लेकर कहा जाता है 1792 में उनका जन्म उत्तर प्रदेश के डोंडिया खेड़ा गांव में हुआ था। उनके पिता ख्यालीराम जी इंदौर के महाराज तुकोजीराव के राज वैद्य थे। ऐसा कहा जाता है कि जब बाबा जी 8 वर्ष के थे तो नर्मदा परिक्रमा करने आए गौरीशंकर जी महाराज की जमात में उन्हें सौंप दिया गया था।

8 वर्ष की उम्र में बाबा गौरीशंकर जी महाराज के सानिध्य में चले गए थे।

8 वर्ष की उम्र में बाबा गौरीशंकर जी महाराज के सानिध्य में चले गए थे।

2005 में बाबा जी ने बता दिया था 2020 में आएगी एक महामारी
उन्होंने बताया कि बाबा ने हिमालय में तपस्या की, शिर्डी वाले सांई बाबा, धूनीवाले दादाजी खंडवा के सानिध्य में भी वे रहे। उनके दर्शन को देशभर के संत आते थे। यादव के अनुसार वे बाबा जी के सानिध्य में 1992 में उज्जैन महाकुंभ के दौरान आए। उन्होंने बताया कि 2005 में जब हम बैठे थे तो बातों-बातों में बाबा जी ने कोराेना बीमारी का जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि 2020 में एक ऐसी महामारी आएगी, जिससे पूरा विश्व ग्रसित हो जाएगा।

लातूर में आए भूकंप काे लेकर कहा था मैं जा रहा हूं
यादव के अनुसार 30 सितंबर 1993 की सुबह 3.56 मिनट पर महाराष्ट्र के लातूर में आए विनाशकारी भूकंप काे 22 साल बीत चुके हैं, इसमें 20 हजार लाेगाें की माैत हुई थी। लेकिन जिस समय यह भूकंप आने वाला था, उसके पहले ही बाबा जी काे इसका आभास हाे गया था। वे उस समय इंदाैर आश्रम में थे। वे बैठे हुए थे। उसी समय उन्होंने भूकंप का जिक्र किया और कहा कि वहां जाना हाेगा। इसके बाद बाबा ताे आश्रम में ही रहे, लेकिन कुछ दिनों बाद हालात सामान्य हुए और मेरी मुलाकात लातूर के एक भक्त से हुई ताे उसने बताया कि बाबा जी भूकंप के समय लातूर में लोगों की सेवा में लगे हुए थे। यह सुन में अचरज में पड़ गया, क्योंकि बाबा तो इंदौर आश्रम में ही हमारे सामने थे।

इंदौर का बर्फानी आश्रम।

इंदौर का बर्फानी आश्रम।

भूकंप को कर दिया था बायपास

उन्होंने बताया कि बाबा ने ऐसी कई भविष्यवाणियां की, लेकिन वे हमेशा प्रचार-प्रसार से दूर रहना चाहते थे। वे हमें ऐसी कई घटनाएं बता दिया करते थे। इसके अलावा उन्होंने विशाखापटनम में आने वाले भूकंप को लेकर हमें आगाह किया था। सभी वैज्ञानिक कह रहे थे काफी तबाही मचेगी, लेकिन बाबा ने कहा कि इस भूकंप को हम बायपास कर देंगे। हुआ भी ऐसा ही वहां किसी प्रकार की कोई त्रासदी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बाबा मन पढ़ लिया करते थे। वे माथा देखकर आपके बारे में सबकुछ बता दिया करते थे।

बांसवाड़ा के कारीगर से बनवाई प्रतिमा

इंदौर के बर्फानीधाम आश्रम को लेकर कहा कि यहां पर राज राजेश्वरी महात्रिपुर सुंदरी का मंदिर है। माता के दर्शन से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। मंदिर की प्रतिमा बांसवाड़ा में विराजित प्रतिमा के जैसी ही है। क्योंकि बांसवाड़ा के ही कारीगर से इसे बनवाया गया था। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 1996 में हुई थी। यहां पर पारे के भोलेनाथ हैं। पारेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि आश्रम की शुरुआत अमरकंटक से हुई थी। इसके बाद राजनांदगांव, इंदौर, विशाखापटनम सहित देश के कई राज्यों में बाबा के आश्रम हैं। राजनांदगांव का आश्रम काफी बड़ा और प्रसिद्ध है।

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