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चिदंबरम बोले- UPA अध्यक्ष कोई PM की पोस्ट नहीं, जिसके लिए पवार अपनी दावेदारी करना चाहते हों

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नई दिल्ली7 घंटे पहले

शिवसेना ने शरद पवार को UPA अध्यक्ष बनाए जाने की बात कही है। इसके बाद कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने इस पर अपनी राय जाहिर की।

शरद पवार को UPA अध्यक्ष बनाए जाने की शिवसेना की मांग पर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने इस बारे में शिवसेना और पवार को एक तरह से जवाब दे दिया है। चिदंबरम ने कहा कि UPA चेयरपर्सन कोई प्रधानमंत्री का पद नहीं होता। मुझे नहीं लगता कि शरद पवार खुद कभी UPA गठबंधन की कमान संभालना चाहेंगे। वैसे भी कांग्रेस UPA की सबसे बड़ी पार्टी है और इसी वजह से उसका नेता ही इस गठबंधन का अध्यक्ष है।

पवार खुद चेयरपर्सन नहीं बनना चाहेंगे
न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में चिदंरबरम ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि पवार खुद UPA का अध्यक्ष बनना चाहेंगे, क्योंकि इसका कोई सवाल ही नहीं उठता। जब भी गठबंधन के दलों की मीटिंग होती है तो स्वाभाविक तौर पर वही व्यक्ति अध्यक्षता करता है, जो सबसे बड़ी पार्टी का नेता होता है। वैसे भी हम को प्रधानमंत्री को सिलेक्ट कर नहीं रहे हैं। मेरे हिसाब से यूपीए चेयरमैन या चेयरपर्सन जैसी कोई चीज नहीं है।’

कांग्रेस नेता ही UPA का अध्यक्ष
पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा, ‘UPA की बैठक जरूरी है। अगर हमारी पार्टी गठबंधन दलों की मीटिंग बुलाती है तो स्वाभाविक है कि हमारा ही नेता अध्यक्षता करेगा। जरूरत इस बात की है कि गठबंधन में शामिल सभी दल एक-दूसरे का सहयोग करें। देश में इसे मजबूत बनाया जाए। दूसरी पार्टियां भी मीटिंग बुला सकती हैं, कांग्रेस इसमें शामिल होगी। लेकिन, अगर कांग्रेस मीटिंग बुलाती है तो फिर उसका नेता ही इसकी अध्यक्षता करेगा। UPA में 9 या 10 पार्टियां हैं। कांग्रेस इनमें सबसे बड़ी पार्टी है। लोकसभा और राज्यसभा में हमारे 95 से 100 सांसद हैं।’

इस बयान की वजह शिवसेना का स्टैंड
दो दिन पहले शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादकीय में कहा गया, ‘UPA की कमान शरद पवार को सौंपी जानी चाहिए। वर्तमान में सोनिया गांधी UPA की चेयरपर्सन हैं। सोनिया ने अब तक UPA अध्यक्ष की भूमिका बखूबी निभाई, लेकिन अब बदलाव करना होगा। दिल्ली में आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के लिए आगे आना होगा। कई विपक्षी दल हैं जो UPA में शामिल नहीं हैं। उन दलों को साथ लाना होगा। कांग्रेस का अलग अध्यक्ष कौन होगा, यह साफ नहीं है। राहुल गांधी किसानों के साथ खड़े हैं, लेकिन कहीं कुछ कमी लग रही है। ऐसे में शरद पवार जैसे सर्वमान्य नेता को आगे लाना होगा।’

सामना में लिखा गया कि अभी जिस तरह की रणनीति विपक्ष ने अपनाई है, वह मोदी और शाह के आगे बेअसर है। सोनिया गांधी का साथ देने वाले मोतीलाल वोरा और अहमद पटेल जैसे नेता अब नहीं रहे। इसलिए पवार को आगे लाना होगा।

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