Home राष्ट्रीय जहां मवेशी बांधे जाते थे, उस जगह को स्कूल में बदला; 7...

जहां मवेशी बांधे जाते थे, उस जगह को स्कूल में बदला; 7 करोड़ का प्राइज मिला

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें हलचल टुडे ऐप

मुंबई15 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

महाराष्ट्र के रणजीत सिंह डिसले ने यह प्राइज जीता है। उन्होंने लड़कियों को स्कूल तक लाने के लिए घर-घर जाकर पैरेंट्स को अवेयर किया।

महाराष्ट्र के सोलापुर जिला परिषद स्कूल के एक प्राइमरी टीचर रणजीत सिंह डिसले ने ग्लोबल टीचर प्राइज जीता है। उन्हें 7 करोड़ रुपए मिले हैं। यह पहली बार है जब किसी भारतीय को यह प्राइज मिला है। यूनेस्को और लंदन स्थित वार्के फाउंडेशन की तरफ से दिए जाने वाले ग्लोबल टीचर प्राइज की घोषणा 3 दिसंबर को की गई थी।

जानवरों को बांधने वाले शेड को स्कूल में बदला
वार्के फाउंडेशन 2014 से हर साल ग्लोबल टीचर प्राइज दे रही है। इस साल दुनिया के 140 देशों के 12 हजार से ज्यादा टीचर्स दौड़ में थे। इनमें से 10 फाइनलिस्ट चुने गए। रणजीत को गर्ल्स एजुकेशन को बढ़ावा देने और भारत में QR कोड बेस्ड किताबों के अभियान को बढ़ाने के लिए ग्लोबल टीचर प्राइज के लिए चुना गया। परितेवाड़ी जिला परिषद स्कूल में डिसले ने 2009 में टीचिंग शुरू की थी। तब वहां मवेशियों को रखने के लिए शेड बना हुआ था। रणजीत ने प्रशासन और स्थानीय लोगों से गुहार लगवाकर स्कूल को ठीक करवाया।

प्राइज मिलने की घोषणा होते ही रणजीत खुशी से झूम उठे।

प्राइज मिलने की घोषणा होते ही रणजीत खुशी से झूम उठे।

रणजीत ने बताया, “मुझे नौकरी मिलने की खुशी थी, लेकिन जब मैं स्कूल पहुंचा तो स्कूल के हाल ने मुझे दुखी कर दिया। यह स्कूल कम और बकरियों को बांधने का बाड़ा ज्यादा लग रहा था।”

बच्चों को स्कूल तक लाना चुनौती था
सिर्फ स्कूल ही नहीं स्थानीय लोगों को बेटियों को स्कूल भेजने के लिए मनाने का काम भी रणजीत ने किया। उन्होंने बताया कि मुफलिसी में जीने वाले ज्यादातर लोग हर दिन अपने बच्चों को खेत में काम करने के लिए भेज देते थे। उन्हें स्कूल आने के लिए मनाने का काम आसान नहीं था। हमने सबसे पहले माता-पिता को अवेयर किया, फिर घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल लाने का काम किया।

6 महीने तक बच्चों को नहीं दी किताबें
रणजीत ने आगे बताया, ‘स्कूल आने वाले बच्चों को सिलेबस और किताबों से बोरियत न हो, इसलिए 6 महीने तक उन्हें किताबें खोलने ही नहीं दीं। हम मोबाइल और लैपटॉप की मदद से उन्हें गाने, कहानी और कार्टून दिखाते। साथ ही उनकी नॉलेज बढ़ाने की कोशिश भी करते रहे। बच्चों ने धीरे-धीरे स्कूल आना शुरू कर दिया। लॉकडाउन से पहले तक स्कूल में फुल स्ट्रेंथ में बच्चे पढ़ने आते रहे।’

रणजीत ने आठ देशों के 5,000 से ज्यादा छात्रों की शांति सेना बनाई है।

रणजीत ने आठ देशों के 5,000 से ज्यादा छात्रों की शांति सेना बनाई है।

8 अशांत देशों के लिए बनाई शांति सेना
सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में नहीं रणजीत सिंह ने दुनिया के आठ देशों में घूम-घूम कर 5,000 स्टूडेंट्स को साथ लेकर एक शांति सेना बनाई है। ये आठ देश- भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक, इजरायल, फिलिस्तीन, अमेरिका और उत्तर कोरिया हैं। इन देशों में शांति स्थापित करने की कोशिश में उन्होंने लेट्स क्रॉस द बॉर्डर प्रोजेक्ट शुरू किया।

87 देशों के 300 स्कूलों में दे रहे हैं शिक्षा
विदेशों में रणजीत माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ब्रिटिश काउंसिल, प्लिपग्रिड, प्लकर्स जैसे इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस के साथ काम करते हैं, और वर्तमान में वर्चुअल फील्ड ट्रिप प्रोजेक्ट के जरिए दुनियाभर के 87 देशों के 300 से ज्यादा स्कूलों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं।

12 अंतर्राष्ट्रीय और 7 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते
पिछले नौ सालों में रणजीत ने 12 अंतर्राष्ट्रीय और 7 राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। इसके अलावा 12 एजुकेशनल पेटेंट उनके नाम पर हैं। माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला ने रणजीत के काम की तारीफ करते हुए स्पेशल वीडियो हिट रिफ्रेश लॉन्च किया है।

Source link

Most Popular

2022 तक तैयार होगी नई संसद, जानें कैसा है 865 करोड़ की योजना का ले-आउट प्लान

Hindi NewsNationalGovernment Build New Parliament Building By 2022 Gujarat Architect Bimal Patel Design ItAds से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें...

कम उधारी की मांग और लोन रिकवरी में दिक्कत के कारण NBFC को हो सकता है भारी घाटा

Hindi NewsBusinessRBI Report Update; Non Banking Finance Companies NBFCs May Suffer Huge LossesAds से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें हलचल...

'अंदाज अपना अपना' और 'बॉर्डर' के सिनेमेटोग्राफर ईश्वर बिद्री का 87 साल की उम्र में निधन, दिल का दौरा पड़ने पर अस्पताल में कराया...

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें हलचल टुडे ऐप19 दिन पहलेकॉपी लिंकबॉलीवुड के दिग्गज सिनेमेटोग्राफर ईश्वर बिद्री का रविवार...

राम जन्मभूमि धन निधि संग्रहण के तहत निकाली शोभायात्रा

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें हलचल टुडे ऐपखरगोन5 दिन पहलेकॉपी लिंकग्राम में शनिवार रात को सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर...