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मां-बाप की मदद के लिए तेलंगाना आए रामकृष्णा ने एक फोन पर 1500 किमी का सफर किया, लखनऊ के केजीएमयू में सैंपल जांच का जिम्मा संभाला

  • 29 साल के माइक्रोबायोलॉजिस्ट रामकृष्णा केजीएमयू में टीबी पर रिसर्च कर रहे हैं
  • कोरोना सैंपल्स की जांच के लिए रामकृष्णा ने अपनी थीसिस छोड़, मां-बाप से झूठ भी बोला

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 10:13 PM IST

लखनऊ. कोरोनावायरस के खिलाफ लड़ाई में कोरोना वारियर्स पूरी लगन से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कई कोरोना वॉरियर्स ने मिसाल पेश की हैं, उन्हीं में से एक हैं तेलंगाना के निवासी रामकृष्णा। 29 साल के माइक्रोबायोलॉजिस्ट रामकृष्णा ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में अपना योगदान देने के लिए 1500 किलोमीटर दूर लखनऊ तक का सफर किया। वे यहां किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में स्थित लैबोरेटरी में पहुंचे और कोरोना सैंपल्स की जांच शुरू की। इसके लिए उन्होंने अपने माता-पिता से झूठ भी बोला। रामकृष्णा के बारे में प्रियंका गांधी ने भी ट्वीट किया और एक प्रशंसा पत्र भी भेजा है। प्रियंका ने कहा कि भारत में लाखों ऐसे सैनिक हैं, जिन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।

तेलंगाना के खम्मम जिले के एक गांव में रहने वाले रामकृष्णा केजीएमयू पीएचडी स्कॉलर हैं। वे अपने किसान माता-पिता की मदद के लिए आए थे। उनकी डिपार्टमेंट हेड अमिता जैन ने उन्हें फोन किया किया और बताया कि कोविड-19 के सैंपल की जांच के लिए लैबोरेटरी में रामकृष्णा की जरूरत है। एक सैनिक की तरह रामकृष्ण ने तुरंत अपने बैग पैक किए और एक घंटे में तैयार हो गए। उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि वे हैदराबाद में अपने दोस्त के यहां थीसिस पूरी करने जा रहे हैं, क्योंकि गांव में वह सही से काम नहीं कर पा रहे हैं। परिजनों ने बहुत मुश्किल से उन्हें जाने दिया दिया, क्योंकि हैदराबाद भी उनके घर से 270 किलोमीटर दूर है।

लगातार सैंपल्स की जांच में जुटे हैं रामकृष्णा
रामकृष्णा 22 मार्च को हैदराबाद पहुंचे। इसी दिन जनता कर्फ्यू था। 23 मार्च की सुबह चार बजे उनकी फ्लाइट थी। रात को ढाई बजे फ्लाइट पकड़ने के लिए निकल पड़े। एयरपोर्ट तक पहुंचने में भी बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा। रामकृष्ण ने बताया कि रास्ते में पुलिसवालों ने रोका। हालांकि, वे फ्लाइट पकड़कर लखनऊ आ गए। तब से वह लगातार सैंपल टेस्ट करने का काम कर रहे हैं। रामाकृष्णा टीबी पर रिसर्च कर रहे हैं। साल 2014 में वे केजीएमयू आए थे। 6 महीने पहले ही उनका प्रोजेक्ट पूरा हो गया और अब थीसिस जमा करनी थी इसीलिए वे गांव चले गए थे। अब वह थीसिस अधूरी छोड़कर कोरोना की जांच में जुट गए हैं।

मेहनती और काबिल हैं रामकृष्ण
केजीएमयू के माइक्रोबॉयोलाजी डिपार्टमेंट की हेड अमिता जैन ने बताया कि उन्होंने अपने चार स्टूडेंट को मदद के लिए फोन किया है। इसमें दो लखनऊ में थे, जिन्होंने तुरंत जॉइन कर लिया। रामकृष्णा और एक अन्य दूर थे। रामकृष्ण को फोन कर उन्होंने कहा था कि हमें तुम्हारी मदद चाहिए। इसके बाद रामकृष्णा ने एक घंटा का समय मांगा और एक घंटे बाद फोन कर कहा कि वे आ रहे हैं। उन्होंने ये भी बताया कि रामाकृष्णा बहुत मेहनती और काबिल हैं।

रामाकृष्णा ने बताया कि अभी उन्हें यह नहीं मालूम है कि उन्हें कितनी सैलरी मिलेगी या कौन सी पोस्ट मिलेगी?  उनकी हेड ने बताया है कि इमरजेंसी के इस दौर में कुछ पोस्ट निकाली गई हैं और कुछ फंड का भी इंतजाम किया गया है। डॉ. अमिता जैन ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन जरूर कुछ करेगा।

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