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वैक्सीन लगाने के लिए हमारे देश में इस समय रेडीनेस नहीं: टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट डॉ. कांग

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24 मिनट पहलेलेखक: रवींद्र भजनी

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  • प्रोफेसर कांग का कहना है कि विदेशी वैक्सीन को बिना जांच-पड़ताल के भारत में अप्रूवल नहीं मिलता
  • भारत में एडल्ड इम्युनाइजेशन के लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं है, ऐसे में सबको कैसे वैक्सीन लगाएंगे?

देश की टॉप वैक्सीन साइंटिस्ट डॉ. गगनदीप कांग का कहना है कि कोरोनावायरस वैक्सीन को लेकर हमारा देश तैयार ही नहीं है। किसी भी स्तर पर रेडीनेस नहीं दिख रही है। प्राइवेट सेक्टर को क्या करना है, यह तो सरकार ने अब तक बताया ही नहीं है। सिर्फ सरकारी मशीनरी के भरोसे भी वैक्सिनेट करने की तैयारी नहीं दिख रही है। हलचल टुडे ने रॉयल सोसायटी (लंदन) में फैलो के तौर पर चुनी गईं भारत की पहली महिला साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. कांग से वैक्सीन और वैक्सिनेशन पर विस्तार से बात की। पेश है उनसे बातचीत के मुख्य अंशः

भास्करः क्या हमारा देश सबको वैक्सीन लगाने के लिए तैयार है?

डॉ. कांगः नहीं। फिलहाल तो ऐसा दिख नहीं रहा। सरकार की तैयारी अभी शुरुआती स्टेज पर है। वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल देने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। सभी लोगों को इम्युनाइज करेंगे तो अभी जो प्रोग्राम चल रहे हैं, उनका क्या होगा? सारा स्टाफ, कोल्ड चेन सप्लाई को हमने कोविड-19 वैक्सीन के लिए सुरक्षित रखा तो जो प्रोग्राम्स अभी चल रहे हैं, उनका क्या होगा? इसे लेकर कोई बात ही नहीं हुई है।

भास्करः किस तरह की तैयारी की जरूरत होगी वैक्सिनेशन के लिए?

डॉ. कांगः वैक्सिनेशन के लिए बहुत-सी तैयारियां करनी होंगी। इंजेक्शन देना है तो मेडिकल वेस्ट का डिस्पोजल भी देखना होगा। इस पर फिलहाल कोई स्पष्टता नहीं है। बैकग्राउंड चेक्स की व्यवस्था भी करनी होगी। समझ लीजिए कि आज एक लाख लोगों को वैक्सीन दी है, तो उनकी मॉनिटरिंग करनी होगी। हो सकता है कि पांच लोगों को जुकाम हो जाए, दो लोगों को स्ट्रोक हो जाए, एक को कैंसर हो जाए। तो क्या इसकी वजह वैक्सीन होगी? लोगों को तो ये ही लगेगा कि यह सब वैक्सीन से हुआ है। हाल ही में कोवीशील्ड के ट्रायल्स के दौरान चेन्नई में वॉलंटियर की तबीयत खराब हो गई। कंपनी कह रही है कि वैक्सीन से कोई लेना-देना नहीं है। हो सकता है कि कंपनी सही हो। पर इन्वेस्टिगेशन के बाद ही कहा जा सकेगा कि क्या और क्यों हुआ है। इसके लिए सिस्टम बनाना होगा। क्या करेंगे, किसे रिपोर्ट करेंगे, कम्युनिकेशन किससे करेंगे, मीडिया को कैसे बताएंगे, यह सब तय होगा।

भास्करः हमारे वैक्सिनेशन प्रोग्राम्स गर्भवती महिलाओं और बच्चों को वैक्सीन लगाने तक सीमित हैं। क्या सभी वयस्कों को वैक्सीन लगाने का कोई प्रोग्राम है?

डॉ. कांगः नहीं। हमारे यहां ऐसा कोई प्रोग्राम नहीं है, जिसमें एडल्ट इम्युनाइजेशन होता हो। दुनिया में कई देश एडल्ट्स को इनफ्लुएंजा वैक्सीन लगाते हैं। कुछ देशों में छोटे बच्चों और 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को वैक्सीन दी जाती है। कुछ देशों में सभी एडल्ट्स को। हमने भी सरकार से मांग की है कि एडल्ट्स को इम्युनाइजेशन प्रोग्राम में शामिल किया जाए। पर अब तक उनकी ओर से कोई रिस्पॉन्स ही नहीं आया है।

भास्करः…पर कोविड-19 वैक्सीन तो एडल्ट्स को भी लगेगी?

डॉ. कांगः सही बात है। अगर कोविड-19 का वैक्सीन लगाने के लिए कोई प्लेटफॉर्म बन जाए तो यह देखना होगा कि क्या हम उसका इस्तेमाल अन्य इनफ्लुएंजा वैक्सीन लगाने में कर सकते हैं? अगर कोविड-19 के वैक्सीन को भी इनफ्लुएंजा वैक्सीन की तरह हर साल लगाने की जरूरत पड़ी तो यह करना पड़ सकता है। यह इतना मुश्किल काम नहीं है। जब हमारे यहां इलेक्शन होते हैं, तो एक दिन में लाखों लोग पोलिंग बूथ पर पहुंचकर वोट देते हैं। इतने वर्षों में हमारी इलेक्शन प्रोसेस यहां तक पहुंची है। इसी तरह एडल्ट्स इम्युनाइजेशन प्रोग्राम को भी आगे बढ़ा सकते हैं।

भास्करः क्या वैक्सीन लगाने को लेकर ट्रेनिंग की जरूरत पड़ेगी?

डॉ. कांगः जब भी कोई नई वैक्सीन आती है तो उसके लिए ट्रेनिंग होती है। केंद्र से राज्यों को, राज्यों से जिलों को और जिलों से इम्युनाइजेशन पॉइंट तक यह ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें बताया जाता है कि वैक्सीन का क्या असर होगा, क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं और इनसे कैसे निपटना है? ट्रेनिंग मॉड्यूल बनेगा। पर स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि अब तक तो यह ही नहीं पता कि किस वैक्सीन का इस्तेमाल होगा। एक डोज देना है या दो डोज देना है… यह भी साफ नहीं है। जब वैक्सीन और प्रक्रिया तय होगी, तभी ट्रेनिंग दी जा सकेगी।

भास्करः क्या वैक्सीन अलग-अलग एज ग्रुप्स को दी जा सकती है?

डॉ. कांगः इस पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। यह तय है कि सभी लोगों को एक समय पर वैक्सीन नहीं लगने वाली। प्रायोरिटी ग्रुप्स को पहले वैक्सीन मिलेगी। सरकार ने जो प्लान बनाया है उसमें सबसे पहले फ्रंटलाइन वर्कर्स को और उसके बाद एसेंशियल वर्कर्स को वैक्सीन दी जाएगी। टीचर्स, होम गार्ड्स, पुलिसकर्मी भी एसेंशियल वर्कर्स में आते हैं। उसके बाद बुजुर्गों और हाई-रिस्क ग्रुप को वैक्सीन लगेगी। इसके बाद ही सामान्य आबादी का नंबर आ सकेगा।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के तीन संस्थानों में बन रहे वैक्सीन की जानकारी ली थी।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के तीन संस्थानों में बन रहे वैक्सीन की जानकारी ली थी।

भास्करः UK ने फाइजर का वैक्सीन अप्रूव कर दिया है। मॉडर्ना को भी जल्द ही इमरजेंसी अप्रूवल मिल सकता है। क्या हमारे यहां इन वैक्सीन को अप्रूवल नहीं दे सकते?

डॉ. कांगः नहीं। भारत में वैक्सीन के अप्रूवल ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) देता है। वह सिर्फ उन वैक्सीन को अप्रूवल देता है, जिनके ट्रायल्स भारत में किए गए हों। न तो फाइजर ने अपने वैक्सीन के ट्रायल्स भारत में किए हैं और न ही मॉडर्ना ने। यदि किसी वैक्सीन के ट्रायल्स विदेश में हुए हैं और वहां उसे अप्रूवल मिल गया है तो वह संबंधित ट्रायल्स के डेटा के साथ भारत में अप्लाई कर सकता है, लेकिन उसे यहां भी कुछ लोगों पर, फिर चाहे वह 100 लोगों पर ही क्यों न हो, ट्रायल्स करने होते हैं। वैसे, पिछले साल क्लिनिकल ट्रायल्स के नए रूल्स आए हैं। उसमें ड्रग कंट्रोलर बिना ट्रायल्स के भी इमरजेंसी यूज के लिए किसी वैक्सीन को अप्रूव कर सकता है। यदि ऐसा कोई अप्रूवल दे भी दिया तो भी क्लिनिकल ट्रायल्स जैसी ही निगरानी की जाती है।



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