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30 हेक्टेयर में फैले एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में 13 लाख फूल खिल चुके हैं, लेकिन इस बार इन्हें देखने कोई नहीं आएगा

  • पिछले साल 2019 में 2.5 लाख पर्यटक गार्डन आए थे, हॉलैंड से हर साल मंगवाए जाते हैं फूल  
  • हर साल तीन से चार हफ्ते के लिए यहां फूल खिलते हैं, जिसके लिए 100 माली पूरे साल काम करते हैं
  • 2007 में शुरू हुआ था यह पार्क, 13 साल में पहली बार यहां एक भी पर्यटक नहीं आएगा

आबिद बट

आबिद बट

Apr 12, 2020, 12:42 AM IST

श्रीनगर. एशिया के सबसे बड़े श्रीनगर के इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में फूलों का मौसम आ गया है। जबरवान पहाड़ियों के मुहाने पर 30 एकड़ में बने इस खूबसूरत गार्डन में इस बार 55 वैरायटी के 13 लाख ट्यूलिप खिले हैं। कोरोना संकट के चलते इस बार गार्डन में फूल देखने कोई नहीं आएगा। लिहाजा पार्क सूना पड़ा है।

साल में बमुश्किल तीन से चार हफ्तों के लिए आबाद रहने वाला यह गुलशन इस बार वीरान है।

गार्डन फूल तो शबाब पर हैं, लेकिन इन्हें देखने इस बार कोई नहीं आएगा। कोरोना वायरस के चलते कश्मीर में लॉकडाउन कब तक रहेगा फिलहाल कहना मुश्किल है। सिर्फ कश्मीर में अभी तक 168 कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं, जबकि 3 की मौत हो चुकी है।

मार्च-अप्रैल में ट्यूलिप गार्डन खुलने के साथ ही कश्मीर में टूरिस्ट सीजन की शुरुआत होती है।

बर्फबारी के बाद ट्यूलिप गार्डन और बादामवारी में फूल खिलना कश्मीर में बसंत के आने की निशानी होती है। इससे पहले के सालों में भी लाखों लोग इसे देखने आते रहे हैं। गार्डन का टिकट करीब 50 रुपए होता है।

 पिछले साल करीब ढाई लाख लोग यहां आए थे, जिसमें से एक लाख बाहरी पर्यटक थे। इनमें विदेशी भी शामिल हैं।

कश्मीर में कुल 308 बाग-बगीचे हैं। जिनकी देखरेख फ्लोरीकल्चर डिपार्टमेंट करता है। ट्यूलिप गार्डन भी उन्हीं के जिम्मे आता है। डिपार्टमेंट के 100 माली इसकी देखरेख करते हैं। पहले हार्वेस्टिंग फिर दो-तीन बार सनबर्न और नवंबर में रीप्लांट का काम होता है।

इस बगीचे की तैयारी पूरे साल चलती है। ट्यूलिप का मौसम बीत जाने के तुरंत बाद अगले साल की तैयारी शुरू हो जाती है।

ट्यूलिप गार्डन के एक ओर है डल झील, दूसरी ओर मुगलों का बनाया निशात बाग और तीसरी ओर वह ऐतिहासिक चश्म-ए-शाही, जहां के लिए कहा जाता है कि पंडित नेहरू सिर्फ वहां के चश्मे से निकला पानी ही पीते थे।

यहां हर साल नीदरलैंड्स से 60-70 लाख रुपए के फूल लाए जाते हैं। सरकार ने इसे पिछले साल 80 लाख रु. में आउटसोर्स किया था।

हर साल ट्यूलिप गार्डन में 10 दिन का ट्यूलिप फेस्टिवल होता है, जिसका नाम बहार-ए-कश्मीर है। इस फेस्टिव में घाटी के पारंपरिक संगीत और कला से जुड़े लोग शामिल होते हैं। इस साल इसके होने की भी कोई उम्मीद नहीं है। गार्डन की जमीन सिराजुद्दीन मलिक की थी, जो 1947 के बंटवारे में पाकिस्तान चले गए। तब सरकार ने इसे अपने कब्जे में ले लिया। 

पहले कश्मीर का यह ट्यूलिप गार्डन सिराजबाग कहलाता था।

हॉलैंड के ट्यूलिप दुनियाभर में मशहूर हैं। यहां का कोएकेनहोफ ट्यूलिप गार्डन दुनिया का सबसे बड़ा फूलों का बाग है, जिसे फूलों से प्यार करनेवालों का मक्का कहा जाता है। यहां हर साल सात मिलियन, यानी 70 लाख फूल रोपे जाते हैं, जिनमें ट्यूलिप, डेफोडिल्स, गुलाब और लिली शामिल हैं।

दुनिया के पांच मशहूर ट्यूलिप गार्डन और फेस्टिव में शामिल है श्रीनगर।

दुनिया में ट्यूलिक गार्डन्स में पहले नंबर पर हॉलैंड का कोएकेनहोफ आता है, दूसरे नंबर पर अमेरिका के माउंट वरनोन का स्कगित ट्यूलिप फेस्टिवल है। कनाडा के ओटावा का ट्यूलिप गार्डन तीसरा सबसे मशहूर बाग है। कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन दुनिया में पांचवा सबसे मशहूर बाग माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया के सिलवन टाउन में टेसेलार ट्यूलिप फेस्टिवल दुनिया का चौथा सबसे शानदार आयोजन कहलाता है। 

कश्मीर का ट्यूलिप गार्डन दुनिया में पांचवें नंबर पर है।

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