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5 रिसर्च रिपोर्ट के हवाले से लीडरशिप, उम्र, सेहत और गुस्सा कंट्रोल करने में आगे हैं महिलाएं

  • रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, औसतन पुरुष 68 साल 4 महीने जीते हैं और महिलाओं के लिए यही आंकड़ा 72 साल 8 महीने है
  • 60 साल के बाद पुरुषों में कॉन्फिडेंस घटता है, इसके उलट महिलाओं में इसका लेवल बढ़ता है

हलचल टुडे

Mar 08, 2020, 01:28 AM IST

वीमेन डेस्क. अगर आपके सामने रवीना (काल्पनिक नाम) और रोहन (काल्पनिक नाम) का नाम आए, तो किसे बेहतर मानेंगे? ज्यादातर लोग यही मानेंगे कि रोहन बेहतर होगा क्योंकि वह पुरुष है। …और रवीना तो एक महिला है, इसलिए वह रोहन से बेहतर हो ही नहीं सकती। लेकिन विज्ञान जो कहानी कहता है वो इसके उलट है। रवीना रोहन से लंबी उम्र जी सकती है, कोरोनावायरस से लड़ने में भी वह रोहन से ज्यादा मजबूत है, उसे गुस्सा भी कम आता है। वह ऑफिस में भी ज्यादा बेहतर परिणाम देती है और लीडरशिप में रोहन से ऊपर है। इतना सबकुछ रिसर्च में भी साबित हो चुका है, जो महिलाओं को कमजोर करने वाली तस्वीर तोड़ने के लिए काफी है। अभी भी कोई शक है तो ये रिसर्च पढ़िए और समझिए…

1) कोरोनावायरस से लड़ने में रोहन से ज्यादा पावरफुल रवीना

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, 4 मार्च तक दुनियाभर से कोरोनावायरस के 93,090 मामले सामने आ चुके हैं। चीन के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोन एंड प्रिवेन्शन की रिपोर्ट बताती है कि कोरोनावायरस से मरने वालों में महिलाओं की तुलना में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। पुरुषों का डेथ रेट 2.8% है और महिलाओं का 1.7% है। यानी, मरने वाले 5 लोगों में 3 पुरुष और 2 महिलाएं हैं। 2003 में जब हॉन्गकॉन्ग में सार्स वायरस फैला था, तब भी मरने वालों में महिलाओं के मुकाबले 50% ज्यादा पुरुष थे। ऐसा इसलिए क्योंकि इन्फेक्शन के मामले में महिलाओं की तुलना में पुरुषों का इम्युन सिस्टम ज्यादा कमजोर होता है।  

इसका मतलब : कोरोनावायरस से लड़ने में रवीना का इम्यून सिस्टम रोहन से ज्यादा बेहतर है।

2) ऑफिस में रवीना 10 फीसदी ज्यादा प्रोडक्टिव

2019 में आई कैटेलिस्ट की रिपोर्ट कहती है, दुनियाभर की 39% महिलाएं ही काम पर जाती हैं। अकेले भारत में ही 22% से कम महिलाएं कामकाजी हैं। यानी 100 लोगों के ऑफिस में 22 से भी कम महिलाएं। इन आंकड़ों के बाद ज्यादातर लोग सोच रहे होंगे कि महिलाएं काम नहीं कर सकतीं, क्योंकि उन्हें काम नहीं आता होगा। लेकिन जब ऑफिस में ज्यादा प्रोडक्टिविटी की बात आती है, तो महिलाएं पुरुषों से ज्यादा बेहतर साबित होती हैं। 2018 में प्रोडक्टिविटी प्लेटफॉर्म हाईव ने एक रिसर्च की थी। इसके मुताबिक, महिलाएं पुरुषों की तुलना में 10% ज्यादा प्रोडक्टिव होती हैं। हाईव की रिसर्च बताती है कि ऑफिस में महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले 10% ज्यादा काम भी दिया जाता है। 

इसका मतलब : रवीना को रोहन से 10% ज्यादा काम भी मिल रहा। और रवीना, रोहन से 10% ज्यादा प्रोडक्टिव भी है।

3) लम्बा जीवन जीने में भी रवीना आगे, रिसर्च भी यही कहती है

इसका जवाब साफतौर पर तो किसी को नहीं पता। लेकिन कई रिसर्च कहती हैं तो रवीना ज्यादा लम्बा जीवन जिएगी। अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना की ड्यूक यूनिवर्सिटी ने 250 साल के मेडिकल रिकॉर्ड का एनालिसिस किया और पाया कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं ज्यादा लंबा जीवन जीतीं हैं। इतना ही नहीं, नवजात पुरुष बच्चों के मुकाबले नवजात बच्चियां ज्यादा सर्वाइव भी कर जातीं हैं। एक दिलचस्प फैक्ट ये भी है कि, पुरुषों की ग्लोबल एवरेज लाइफ एक्स्पेक्टेंसी 68 साल 4 महीने है, जबकि महिलाओं की 72 साल 8 महीने। यानी महिलाएं पुरुषों की तुलना में 4 साल 4 महीने ज्यादा जीतीं हैं।

इसका मतलब : रवीना रोहन  से 4 साल 4 महीने ज्यादा जी सकती है।

4) लीडरशिप क्वालिटी से जुड़े 17 मामलों में रवीना आगे

लीडरशिप क्वालिटी के मामले में महिलाओं को कमतर ही समझा जाता है। अक्सर लोग यही कहते दिखते हैं कि महिला है, क्या लीडर बनेगी? आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस संसद में देश का भविष्य तय होता है, वहां 25% से भी कम महिलाएं हैं। लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या 15% से भी कम है। राज्यसभा में तो इनकी संख्या 10% से थोड़ी ही ज्यादा है। मगर, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू (एचबीआर) की रिसर्च बताती है कि लीडरशिप क्वालिटी के मामले में महिलाएं पुरुषों से कहीं ज्यादा बेहतर होती हैं। एचबीआर ने अपने रिसर्च में लीडरशिप क्वालिटी के 19 पॉइंट बताए हैं। इनमें से 17 पॉइंट में महिलाएं पुरुषों से आगे रहीं। सिर्फ दो मामलों में ही पुरुष महिलाओं से बेहतर रहे, लेकिन इसका अंतर भी बहुत कम ही था। एचबीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, 60 साल से ज्यादा की उम्र होने के बाद पुरुषों में जहां कॉन्फिडेंस कम होने लगता है, वहीं इसके उलट महिलाओं में कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ता है। 

इसका मतलब : रवीना रोहन से ज्यादा अच्छी लीडर बन सकती है।

5) घर हो या ऑफिस गुस्सा कंट्रोल करने में भी रवीना अव्वल

ऑफिस में ज्यादा काम आ गया, तो गुस्सा आ गया। ट्रैफिक में फंस गए, तो गुस्सा आ गया। हम जरा-जरा सी बात पर गुस्सा हो जाते हैं। इस हम में भी पुरुष ज्यादा और महिलाएं कम होती हैं। टाटा सॉल्ट लाइट के सर्वे में 68% पुरुष और 54% महिलाओं ने माना कि अगर छुट्टी के दिन ऑफिस का कोई काम आ जाता है, तो उन्हें गुस्सा आ जाता है। ट्रैफिक जाम में फंसने पर गुस्सा आने के सवाल में भी 57% पुरुष और 55% महिलाओं ने हामी भरी। इतना ही नहीं, 64% पुरुष और 61% महिलाओं ने ये भी माना कि अगर कोई बिना उनसे पूछे उनका फोन चार्जिंग से निकाल दे, तो उन्हें गुस्सा आ जाता है। 69% पुरुष और 65% महिलाएं वाई-फाई या इंटरनेट कनेक्शन बंद होने पर हाईपर हो जाते हैं। कुल मिलाकर पुरुषों को महिलाओं की तुलना में ज्यादा गुस्सा आता है।

इसका मतलब : वाई-फाई बंद होने या छुट्टी के दिन भी ऑफिस का काम आने पर रवीना को रोहन के मुकाबले कम गुस्सा आएगा।

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