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डायबिटीज के मरीजों में कोरोनावायरस का संक्रमण जल्द ही धारण कर लेता है गंभीर रूप

  • 9.2% है कोरोना संक्रमित डायिबटीज मरीज की मृत्युदर
  • 13.2% है कोरोना संक्रमित ह्रदय रोगियों की मृत्युदर

हलचल टुडे

Apr 06, 2020, 07:51 PM IST

कोरोना वायरस से ग्रस्त जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनमें हृदय रोगियों और हायपरटेंशन के रोगियों के अलावा डायबिटीज के रोगी ही सबसे ज्यादा थे। यह हाल चीन, अमेरिका, इटली से लेकर भारत तक सभी जगह एक जैसा है। इस संबंध में जर्नल ‘द लांसेट’ में एक अध्ययन भी प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन के मुताबिक भी जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या है, कोरोनावायरस के कारण उनके जीवन को ज्यादा खतरा है। यह अध्ययन चीन के वुहान में कोरोनावायरस से संक्रमित 191 मरीज़ों पर किया गया था। इस अध्ययन में शामिल 54 लोगों की मौत हो गई थी।

डायबिटीज के मरीजों पर ज्यादा खतरा क्यों? 

क्योंकि रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही कम होती है… डायबिटीज से ग्रसित लोगों को संक्रमण का खतरा हमेशा बना रहता है, फिर चाहे कोरोनावायरस हो या सामान्य कोल्ड या फ्लू। हमारे शरीर पर जब भी किसी बीमारी, संक्रमण या तनाव का हमला होता है तो उससे बचाव के लिए हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र यानी इम्युनिटी सिस्टम अपना काम करना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में हमारे शरीर में ग्लूकोज (शुगर) का स्तर बढ़ जाता है। अब जिन लोगों को डायबिटीज नहीं है, उनका शरीर तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाता है और इस तरह ग्लूकोज का स्तर ठीक रहता है। इससे उनका प्रतिरक्षा तंत्र उस बीमारी से शरीर को बचा लेता है। लेकिन डायबिटीज़ के रोगियों का शरीर खुद-ब-खुद पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना सकता। ऐसे में इन लोगों के शरीर में इम्युनिटी सिस्टम के काम करने में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इसका मतलब है कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। नतीजतन, छोटी-मोटी बीमारियां भी इन्हें बीमार कर देती हैं। 

क्योंकि बीमारी ठीक होने में समय लगता है…जिन्हें लंबे समय से डायबिटीज है, उनके शरीर का रक्त प्रवाह भी सुचारू ढंग से नहीं हो पाता है। ऐसे में जब शरीर के अंगों तक रक्त ठीक तरह से नहीं पहुंच पाता, तो क्षतिग्रस्त किसी भी अंग को ठीक होने में वक्त लगता है। कोरोनावायरस से ग्रस्त मरीज में सबसे पहले फेफड़े संक्रमित होते हैं। अगर फेफड़ों का संक्रमण जल्दी से ठीक न हो तो मरीज को निमोनिया हो जाता है और वह जल्दी ही गंभीर निमोनिया में बदल जाता है। इसलिए अगर कोरोनावायरस के कारण डायबिटीज के मरीज के फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है तो उसके निमोनिया से ग्रस्त होने की आशंका कहीं अधिक हो जाती है और यह ऐसे रोगियों के लिए जानलेवा हो जाता है।

तो क्या करें डायबिटीज से ग्रसित लोग?

  • वैसे तो सभी लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग की सलाह दी जा रही है, लेकिन डायबिटीज के मरीजों के लिए कोरोनावायरस के संक्रमण से बचकर रहना ज्यादा ही जरूरी है। 
  • डायबिटीज से ग्रसित लोगों को अपना ब्लड लेवल हमेशा कंट्रोल में रखना चाहिए। इसके लिए उन्हें वे सभी संभव उपाय करने चाहिए जो उन्हें सेहतमंद बनाए रखने में मदद करें। इसमें डाइट कंट्रोल सबसे जरूरी है। इसके अलावा वे घर पर हरसंभव कसरत भी करते रहें। 
  • इन दिनों अगर वे किसी तरह की डायबिटीज संबंधी दवाएं या इंसुलिन ले रहे हैं, तो उसे लेते रहना चाहिए। इसे लेना एक वक्त के लिए भी नहीं भूलना चाहिए।
  • डायबिटीज के मरीजों के लिए शरीर को हाइड्रेट रखना जरूरी है। इसलिए पानी पीते रहें। बिना शक्कर वाली ड्रिंक्स जैसे चाय, ग्रीन टी इत्यादि भी ले सकते हैं।

कीटोन-ब्लड का स्तर जांचते रहें?

टाइप 1 डायबिटीज रोगियों में किसी भी तरह के संक्रमण या बीमारी के दौरान डीकेए (डायबिटीक कीटोएसिडोसिस) का स्तर बढ़ जाता है। अगर इसे नियंत्रण में नहीं रखा जाए तो डायबिटीक के कोमा तक में जाने की नौबत आ सकती है। शरीर में अगर शुगर का स्तर 240 मिलीग्राम/डीएल से ज्यादा है, तो फिर हर 4 से 6 घंटे में कीटोन का लेवल टेस्ट करें। ब्लड के अलावा यूरिन टेस्ट से कीटोन के स्तर का पता लगाया जा सकता है। टाइप 2 डायबिटीज से ग्रसित लोग भी अपने शुगर का टेस्ट हर छह घंटे में करते रहें। ये टेस्ट घर पर ही किए जा सकते हैं। इसका मकसद केवल यह जांचना है कि कीटोन व ब्लड का स्तर नियंत्रण में है या नहीं ताकि आप जरूरत पड़ने पर अपने डॉक्टर से फोन पर परामर्श ले सकें।

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