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नेब्युलाइजेशन सुरक्षित है, सावधानी के साथ इस्तेमाल करें: एक्सपर्ट

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2 घंटे पहले

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  • इंडियन चेस्ट सोसायटी ने कोरोना महामारी के दौरान नेब्युलाइजेशन के लिए जारी की गाइडलाइन

अस्थमा के एक्यूट अटैक, क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की तीव्रता को नियंत्रण करने के लिए और सायटिक फाइब्रोसिस, ब्रोंकाइटिस इत्यादि जैसी सांस की बीमारियों के घरेलू मेंटेनेंस उपचार के लिए अक्सर नेब्युलाइजेशन थेरेपी का उपयोग किया जाता है। नेब्युलाइजर उन रोगियों के लिए उपयोगी हैं जो इनहेलर का उपयोग नहीं कर सकते (जैसे कि बुजुर्ग रोगी), या जिन्हें इनहेल मेडिकेशन की ज्यादा मात्रा की आव्श्यकता होती है।

कोरोना महामारी के इस अभूतपूर्व समय के दौरान अपने फेफड़ों को हेल्दी रखने और उपचार के लिए तरह-तरह के उपाय सुनाई पड़ रहे हैं। इसमें नेब्युलाइजेशन भी शामिल है। इसको देखते हुए भारत में पल्मोनोलॉजिस्ट की शीर्ष संस्था “इंडियन चेस्ट सोसायटी” ने चिकित्सकों के लिए इस संबंध में गाइडलाइन तैयार करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जिसने इस बारे में उपलब्ध सभी अपडेट जमा करके गाइडलाइन तैयार की है। यह गाइडलाइन प्रिंट के अलावा ऑनलाइन उपलब्ध है। इस गाइडलाइन में बताया गया है कि महामारी के दौर में अस्पतालों के साथ साथ घरों में भी नेब्युलाइजर का उपयोग कैसे किया जाए। इस गाइडलाइन को तैयार करने में नागपुर के डॉ. राजेश स्वर्णकार के साथ दिल्ली के डॉ. जीसी खिलनानी, अजमेर के डॉ. नीरज गुप्ता और कोलकाता के डॉ. इंद्रनील हालदार ने सह-लेखक के रूप में कार्य किया है।

लेखकों ने स्पष्ट किया है कि कोविड-19 के संदर्भ में नेब्युलाइजेशन को न्यूनतम से मध्यम जोखिम की श्रेणी में रखा गया है। आईसीएस की गाइडलाइन के मुताबिक महामारी के दौरान नेब्युलाइजेशन के समय पारंपरिक फेस मास्क अवॉयड करना चाहिए, खासतौर पर कोविड-19 के मरीज का उपचार करते समय। इसके बजाय माउथपीस वाले जेट नेब्युलाइजर का इस्तेमाल करना चाहिए। भारत के कई जाने-माने चिकित्सकों ने आईसीएस की इस गाइडलाइन का समर्थन किया है।

मैक्स स्पेशिलिटी हॉस्पिटल, साकेत, दिल्ली के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. विवेक नांगिया, मेट्रो रेस्पिरेटरी सेंटर के चेयरमैन डॉ. दीपक तलवार और पीजीआई चंडीगढ़ के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एसके जिंदल के मुताबिक “अस्थमा के ऐसे मरीज जिन्हें कोविड-19 के लक्षण नहीं हैं या जिन्हें कोविड-19 डायग्नोस नहीं हुआ है वे अपने डॉक्टर द्वारा रिकमंड किया गया नेब्युलाइज मेडिकेशन जारी रख सकते हैं। हालांकि सुरक्षित दूरी बनाए रखना और हाथ धोते रहना जैसे मानक दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी है।”

मुंबई के लंग केयर एंड स्लीप सेंटर के डायरेक्टर डॉ. प्रशांत छाजड़, रूबी हाल क्लिनिक और मोदी क्लिनिक पुणे के कंसल्टेंट डॉ. महावीर मोदी, इंदौर चेस्ट एंड अलर्जी सेंटर के चीफ एलर्जोलॉजिस्ट एंड पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. एसजेड जाफरी के मुताबिक-

“नेब्युलाइजेशन थेरेपी के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाना और डॉक्टर्स, पैरामेडिक्स, देखभालकर्ताओं और मरीजों को नेब्युलाइजेशन के बेहतर रखरखाव और उपयोग की जानकारी देना आज के समय में बहुत जरूरी हो गया है। सबसे पहला कदम तो यह है कि नेब्युलाइजेशन थेरेपी शुरू करने से पहले जानकार चिकित्सक की सलाह जरूर लें। नेब्युलाइजेशन थेरेपी नियमित चिकित्सक के मार्गदर्शन में करने की सलाह दी जाती है।”

क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के चीफ पल्मोनरी फिजीशियन डॉ. डीजे क्रिस्टोफर, राजागिरी अस्पताल केरल के पल्मोनरी मेडिसिन के चीफ कंसल्टेंट डॉ. राजेश वी. और डीएम वायानंद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस केरल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सी रवींद्रन के मुताबिक- “घर पर नेब्युलाइजेशन करने के लिए सभी सावधानियों का पालन करना आवश्यक है जैसे कि एक हवादार कमरे में एक साफ नेब्युलाइजर का उपयोग करना और हर उपयोग के बाद नेब्युलाइजर को कीटाणुरहित करना। उपयोग के पहले और बाद में नेब्युलाइजर को अच्छी तरह साफ करना बहुत जरूरी है। यह भी सलाह दी जाती है कि परिवार के सदस्यों के बीच भी नेब्युलाइजर शेयर न करें। संक्रमण रोकने के लिए हर सदस्य का अपना अलग नेब्युलाइजर होना चाहिए।”

अपोलो हॉस्पिटल बेंगलुरू के चीफ ऑफ क्रिटिकल केयर डॉ. रवींद्र मेहता का कहना है “कोविड काल में कई आवश्यक प्रथाओं का फिर से मूल्यांकन करने को प्रेरित किया है। एरोसोल के आरंभिक भय को फिर से देखने की आवश्यकता है ताकि लोगों को नेब्युलाइजेशन जैसी जरूरी चीजों से वंचित न किया जाए। जब कोविड का प्रसार कम हो जाए तो इसे कोविड के पहले जैसे किया जा सकता है। सर्दियों के मौसम में नेब्युलाइजेशन बीमारी को बिगड़ने से बचाने, मरीज को घर पर रखने और अस्पताल में भर्ती करने से बचाव का एक महत्वपूर्ण साधन है।”

नेब्युलाइजेशन एक सुरक्षित थेरेपी है बशर्ते कि इसे समुचित सावधानी के साथ किया जाए। इस बात को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (नाइस), यूके; इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एरोसोल्स इन मेडिसिन (इसाम), यूएस और ब्रिटिश थोरासिस सोसाइटी (बीटीएस), यूके ने भी मान्य किया है।

उपरोक्त सामग्री – कोविड-19 महामारी के दौरान नेब्युलाइजेशन के लिए इंडियन चेस्ट सोसायटी की गाइडलाइन, डॉ.राजेश स्वर्णकार, डॉ.नीरज एम गुप्ता, डॉ. इंद्रनील हालदार, डॉ. गोपी सी खिलनानी – द्वारा योगदान की गई है।

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