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मौजूदा दौर में खुद पर हावी ना होने दें चिंता और तनाव, घर में रहने के साइड इफेक्ट से ऐसे बचें

  • 18% लोगों को एंग्जायटी डिसऑर्डर हो सकता है इस साल अमेरिका में, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ के अनुसार।
  • 29% लोगों को सार्स वायरस के बाद पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस सिंड्रोम (पीटीएसडी) से जूझना पड़ा था अकेले चीन में साल 2003 में। 
  • 7-8 घंटे की औसत नींद अच्छे स्वास्थ्य की निशानी है। अनिद्रा एंग्जायटी का पहला इशारा है। 

हलचल टुडे

Apr 12, 2020, 04:48 PM IST

कोरोना वायरस से दुनिया के सभी देश प्रभावित हैं। अमेरिका, जर्मनी जैसी आर्थिक महाशक्तियां भी डगमगा रही हैं। शुक्र की बात है कि भारत इस विपदा के सामने डटकर खड़ा है। लेकिन इस विपदा के साइड इफेक्ट के तौर पर एक नई उलझन जरूर सामने आ रही है। कई दिनों से घरों में कैद लोग अब चिंता और तनाव से जूझ रहे हैं। लंबे वक्त तक लिया गया यह तनाव लोगों को गंभीर मानसिक बीमारियों से ग्रस्त कर सकता है। इसलिए इस तनाव की वास्तविक वजह को समझना और जल्दी से जल्दी उनका समाधान ढूंढना जरूरी हो गया है।

आखिर समस्या क्या और क्यों है?

हम हर चीज प्लान करके चलते हैं। जहां हमारी प्लानिंग फेल होती है, हम तनाव लेने लगते हैं। कभी-कभी कुछ स्थितियां ऐसी आ जाती हैं, जिनका न हमें अनुभव होता है और ना ही हमारी कोई तैयारी होती है। इन दिनों कुछ ऐसा ही हो रहा है। कोरोनावायरस और यह लॉकडाउन ऐसी ही अप्रत्याशित परिस्थिति है। इसमें हम मुख्यत: दो समस्याओं से जूझ रहे हैं जो तनाव बढ़ा रही हैं। इसमें सबसे बड़ा आर्थिक पक्ष है। 

लॉकडाउन में लोगों की आर्थिक परिस्थितियां गड़बड़ा गई हैं। घर का बजट बिगड़ गया है। निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के आर्थिक स्रोतों पर या तो संकट है या स्रोत सीमित हो गए हैं। नौकरी के भविष्य को लेकर लोग आशंकित हैं। ऐसे में लोगों के अंदर चिड़चिड़ाहट, गुस्सा और डिप्रेशन केे लक्षण दिखाई देने लगे हैं। जिनके लिए आर्थिक समस्या नहीं है, वे भी तनाव में नजर आ रहे हैं। 

इसकी वजह यही है कि इन दिनों घर के सभी सदस्य चौबीसों घंटे साथ में हैं। अभी हम क्वालिटी टाइम के बजाय क्वांटिटी टाइम बिता रहे हैं। इससे तालमेल बैठाने यानी एडजस्टमेंट की समस्या आ रही है जो वैचारिक मतभेद, झगड़ों और तनाव का कारण बन रही है।

इन 5 तरीकों से दूर होगा तनाव

1. सबसे पहले बजट बनाएं

अधिकांश परिवारों में इस समय तनाव की सबसे बड़ी वजह आर्थिक है। अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर परिवार के सभी वयस्क सदस्यों से बात करें और जो परेशानियां आ सकती हैं, वे उनके साथ साझा करें। फिर कागज पर बदली हुईं परिस्थितियों के अनुसार घर का बजट तैयार करें। जब आप इस बजट को देखेंगे तो पाएंगे कि उसमें से बहुत सारा खर्च आप फिलहाल के लिए टाल सकते हैं और इस तरह बड़े तनाव से बच सकते हैं।

2. हानि-लाभ के सिद्धांत पर चलें

अगर हम इस समय जीवन को सही-गलत के सिद्धांत पर चलाएंगे तो बहुत सारी परेशानियां आएंगी, जैसे तुमने ये काम गलत किया, तुम्हें ऐसी बात करनी या नहीं करनी चाहिए आदि। लेकिन हम अगर हानि-लाभ के सिद्धांत को मानंे तो हमारा एडजस्टमेंट अच्छा रहेगा। जैसे ऐसा कोई भी काम करने से बचें, जिससे आप को हानि हो या किसी दूसरे को हानि हो। इसे विन-विन का फार्मूला भी कहते हैं। अगर दंपतियों में कंपेटिबिलिटी (तालमेल) का मुद्दा है, तो कोशिश करें कि चौबीसों घंटे एक-दूसरे के सामने न रहें। एक-दूसरे को नियंत्रित करने की कोशिश भी न करें। अपने साथी की या घर के सदस्यों की आलोचना न करें।

3. जागने व सोने का रुटीन बनाएं

तनाव का एक बड़ा कारण यह भी है कि हम सबका रुटीन बिगड़ गया है। जैसे हम सुबह लेट जाग रहे हैं। लेट जागने से ही तनाव हावी होने लगता है। इसलिए सबसे पहले तो जागने और सोने का वैसा ही रुटीन बनाएं, जैसा लॉकडाउन के पहले था। यह अकेला नियम ही तनाव को काफी हद तक दूर करने में मदद करेगा। इसी तरह नाश्ते, लंच, डिनर का भी स्पष्ट रुटीन तय करें।

4. अपनी टू डू लिस्ट बनाएं

अपनी टू-डू लिस्ट बनाएं, ताकि जब भी परिस्थितियां सामान्य हों, तब जिंदगी को किस तरह आगे बढ़ाना है, आप तय कर पाएं। यह वक्त अवसरों का भंडार भी हो सकता है। इस वक्त हम अपने कॅरिअर को लेकर नई स्किल डेवलप कर सकते हैं। इससे हम व्यस्त रहेंगे और नई स्किल सीखने से हममें आत्मविश्वास भी पैदा होगा जो अंतत: तनाव को ही कम करने में मदद करेगा।

5. हॉबीज को पूरा करें

हम अक्सर शिकायत करते रहते हैं कि समय नहीं होने के कारण अपनी हॉबीज पूरी नहीं कर पाते। अब जब आपके पास समय है तो इसका इस्तेमाल अपनी हॉबीज को पूरा करने में कीजिए। यह आपको एनर्जी से भरेगी, जिससे आपके शरीर में हैप्पी हॉर्मोन रिलीज होंगे। ये हॉर्मोन आपके तनाव के लेवल को कम करने में मदद करेंगे।

खुद को सहारा देने का भी वक्त है यह

कोरोना के कारण अभी उदासी सी छाई हुई है। अंधेरा है, अधूरापन है। पर हमेशा की तरह यह वक्त भी टल जाएगा। लेखक विलियम स्टायरॉन ने लिखा है कि डिप्रेशन का दर्द सिर्फ वही व्यक्ति समझ सकता है, जिसने इसे झेला हो। इस मुश्किल घड़ी में जब आप किसी चिंतित, चिड़िचिड़े या मानसिक रूप से अस्थिर व्यक्ति को देखें, तो उससे बात करते समय या सलाह देते समय विलियम के इस कथन को अपने जेहन में रखना जरूरी है ताकि हमारे शब्द सिर्फ सहानुभूति भरे शब्द न हो, उसमें समानुभूति की भावना भी हो। अंग्रेज़ी में एक कहावत है ‘पुल योरसेल्फ टुगेदर’। मतलब अपनी भावनाओं को नियंत्रित करते हुए ठीक होने के दिशा में आगे बढ़ना। जब आप डिप्रेशन में होते हैं, तब आप वह नहीं रह जाते जो कि आप असल में हैं। क्वारंटीन का यह टाइम बिल्कुल अलग है। अगर आप या आपका कोई नज़दीकी चिंताग्रस्त हैं, तो उसका सहारा बनें।

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